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कुछ भी हो, तिब्बत जाएगी ओलंपिक मशाल : चीन

चीन ने बुधवार को साफ तौर पर कह दिया कि तिब्बत में भले ही तनाव रहे या विरोध किया जाए लेकिन बीजिंग ओलंपिक की मशाल तो वहां से जरूर गुजरेगी और निर्धारित कार्यक्रम के तहत माउंट एवरेस्ट पहुंचेगी। इस बीच, तिब्बत की राजधानी ल्हासा में अब हालात सामान्य हो रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही सामान्य हैं, बाजार भी पूरी तरह खुल गए हैं और स्कूल-कॉलेजों में सामान्य तरीके से पढ़ाई हो रही है। तिब्बत में लोकतंत्र समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 14 को यहां भड़के दंगों के सिलसिले में 105 लोगों ने आत्मसमर्पण भी कर दिया है। गौरतलब है कि तिब्बत की स्थानीय सरकार ने हिंसक प्रदर्शन करने वालों को किसी सख्त कार्रवाई से बचने के लिए सोमवार मध्यरात्रि तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया था। तिब्बत व उसके आसपास भड़की हिंसा के बाद बीजिंग आेलंपिक के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी। चीन इन खेलों के आयोजन के माध्यम से खुद के एक विश्व शक्ित के रूप में उदय की खुशी में मनाना चाहता है जबकि तिब्बती कार्यकर्ता चाहते हैं कि आेलंपिक मशाल तिब्बत नहीं आए। बीजिंग ओलंपिक खेलों के लिए आयोजन समिति (बीओसीओजी) के कार्यकारी उपाध्यक्ष जियांग जियू ने बुधवार को कहा कि तनावपूर्ण स्थितियों का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और ओलंपिक मशाल तय कार्यक्रम के अनुसार ही तिब्बत से गुजरेगी। संवाद समिति शिन्हुआ के मुताबिक जियांग ने कहा कि आयोजकों को इस बात का पूरा भरोसा है कि तिब्बत की क्षेत्रीय सरकार यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराना सुनिश्चित करेगीष आठ से 24 अगस्त तक बीजिंग में होने वाले आेलंपिक की मशाल आगामी सोमवार को यूनान के आेलंपिया से अपना सफर शुरू करेगी। मशाल पूरी दुनिया का चक्कर लगाते हुए 31 मार्च को बीजिंग पहुंचेगी जहां इससे दूसरी मशाल जलाकर उसे तिब्बत ले जाया जाएगा। मशाल को दो बार तिब्बत ले जाने का कार्यक्रम है। जियांग ने कहा कि उनकी राय है कि मशाल के विरोध की गतिविधियां आेलंपिक खेलों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इन्हें पंसद करने वालों के लिए चुनौती है।

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