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‘1983 की जीत से मिली पहचान’

बनाम 2007। कौन सी जीत बड़ी थी, 1ी विश्व कप विजय या 2007 की 20-20 विश्व कप विजय? इस विषय पर सिएट ने ‘दि सिएट बिग क्रिकेट डिबेट’ का आयोजन किया। इसमें पूर्व टेस्ट क्रिकेटर चेतन चौहान और हिन्दुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार प्रदीप मैगजीन ने जोर-शोर से इस बात का समर्थन किया कि भारतीय क्रिकेट में 1े विश्व कप की जीत ने सबसे अहम भूमिका निभाई। वहीं पूर्व क्रिकेटर निखिल चोपड़ा का जोर इस बात पर रहा कि 20-20 विश्व कप जीत ने क्रिकेटरों की दुनिया को बदल कर रख दिया है। चौहान ने कहा ‘1में मिली जीत से भारत को पूरी दुनिया में मान्यता मिली। उस जमाने में न तो सीधे प्रसारण की सुविधा थी और न ही मीडिया का इतना प्रचार था लेकिन इसके बावजूद लोगों के जेहन में उस जीत की यादें अब भी ताजा हैं। उस जीत से लोग भारत की ताकत को मानने लगे थे।’ चौहान ने कहा कि 20-20 क्रिकेट समय की जरूरत हो सकता है लेकिन यह टेस्ट या वनडे का विकल्प नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि 20-20 क्रिकेट फन है और महज मारधाड़ खेलने वाले खिलाड़ी ही इसमें सफल हो सकते हैं। क्रिकेटर की असली परीक्षा तो टेस्ट क्रिकेट है। चोपड़ा ने कहा ‘20-20 क्रिकेट ने खिलाड़ियों में नई आस जगाई है। जो खिलाड़ी टीम में जगह पाने में वंचित रह गए हैं, उन्हें भी लगता है कि वे आईपीएल और आईसीएल में अच्छा प्रदर्शन कर टीम में शामिल हो सकते हैं।’ सलीम दुर्रानी ने कहा ‘टेस्ट क्रिकेट एक विशाल पेड़ है और एकदिवसीय तथा 20-20 क्रिकेट उसकी शाखाएं हैं। वक्त बदल गया है इसलिए लोग टेस्ट क्रिकेट के साथ दूसरी शाखाआें में दिलचस्पी ले रहे हैं।’

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