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माननीयों को सूचना न दी तो खैर नहीं

अब विधानसभा के सदस्यों द्वारा सदन में उठाए गए मसलों पर शासन के विभिन्न विभागों द्वारा सूचना न देना अफसरों को भारी पड़ेगा। विधानसभा की नियम समिति की सिफारिश पर यह तय कर दिया गया है कि अध्यक्ष द्वारा किसी सदस्य की सूचना पर शासन का ध्यान आकर्षित करने के निर्देश के बावजूद यदि एक माह के भीतर संबंधित सदस्य या विधानसभा सचिवालय को कृत कार्यवाही से अवगत न कराया गया तो ऐसे प्रकरण में संबंधित विभाग का मंत्री जाँच कराकर दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर उससे सदन को अवगत कराएँगे।ड्ढr नियम समिति का प्रतिवेदन हाल में बजट सत्र में सदन में प्रस्तुत किया गया था। सदन ने इसे स्वीकार कर लिया। इस तरह मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा की नियम समिति ने अपने प्रतिवेदन में मंत्री की जवाबदेही तय कर दी है। सदन में प्राय: सदस्य शिकायत करते थे कि उनके द्वारा नियम 301, 51 और 56 के तहत दी गई सूचनाओं पर अध्यक्ष पीठ से शासन का ध्यान आकृष्ट कर दिए जाने के बावजूद शासन के विभिन्न विभागों द्वारा कृत कार्यवाही की सूचना संबंधित सदस्यों और विधानसभा सचिवालय को अधिकांश मामलों में प्राप्त नहीं हो रही है। जबकि अध्यक्ष के निदेशों में पहले से प्रावधान था कि सूचना देना आवश्यक है। अब नियम समिति की सिफारिश पर एक महीने के भीतर सूचना न देने वाले अफसर के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान कर दिया गया है। कांग्रेस के ईश्वर चंद्र शुक्ला की पहल पर विधानसभाध्यक्ष सुखदेव राजभर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदन की पंद्रह सदस्यीय नियम समिति को यह मसला सौंप दिया था।

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  • Web Title: माननीयों को सूचना न दी तो खैर नहीं