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होली में खपाया जा रहा है सरसों का नकली तेल

एकदम गाढ़ा पीला रंग, खुशबू और तीक्ष्ण झार। सूँघने से कोई भी शक नहीं कर सकता है कि यह सरसों का तेल नकली होगा या तनिक भी मिलावट होगी। पर, आपकी आँखें और नाक धोखा खा सकते हैं। हो सकता है कि यह सरसों का तेल जले हुए मोबिल ऑयल, खराब पेट्रो पदार्थो को रिफाइन कर बनाए गए ऑयल और राइसब्रान से बना हो। मिलावटखोर इन तेलों में रंग, खुशबू और मिर्च का अर्क मिलाते हैं। 50 रुपए प्रति किलो में तैयार होने वाला यह तेल व्यापारी इस समय 68 से 70 रुपए किलो बेच रहे हैं। यह तेल प्रतिष्ठित ब्राण्डों की नकली पैकिंग में धड़ल्ले से बिक रहा है।ड्ढr होली को देखते हुए यह गोरखधंधा फिर चरम पर है। राजधानी में नकली सरसों के तेल के चौक, रकाबगंज, अमीनाबाद, लालकुआँ और डालीगंज में अड्डे हैं। इनमें चौक व डालीगंज के व्यापारियों ने अपने गोदामों में जमीन में बड़े टैंक बनवा रखे हैं। पुराने लखनऊ में सरसों के तेल के एक बड़े कारोबारी हैं। इनके यहाँ कानपुर में लगी रिफाइनरियों से अखाद्य तेल आता था। इसी से सरसों का तेल बनाया जाता था। डॉलीगंज में एक बड़े गोदाम में यह रिफाइन और राइस ब्रॉन आयल से सरसों का तेल बनाया जा रहा है। इसी तरह रकाबगंज में भी यह धंधा चल रहा है। बीते बुधवार व शुक्रवार को कानपुर देहात स्थित एक रिफाइनरी से रात 10 और 11 बजे के बीच 15 टैंकर तेल राजधानी आया। ये टैंकर पुराने लखनऊ (11 टैंकर) और डालीगंज (चार टैंकर) में उतरे। एक टैंकर में 120 कुंतल तेल होता है। एक टैंकर की तेल की कीमत 5,76,820 रुपए है। इस अखाद्य तेल में खुशबू और रंग मिलाकर सरसों के तेल जैसा बनाया जा रहा है। इनकी ऐसी ब्रांडेड पैकिंग हो रही है कि लोग चौंक जाएँगे। इन ब्रांडों के सरसों के तेल के बाजार में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। व्यापारी नेता राधेश्याम गुप्त बताते हैं कि नकली सरसों के तेल का धंधा बदस्तूर जारी है। कानपुर, बरेली, खैरागढ़ (आगरा) इसके गढ़ हैं। यह जहर है। होली में सरसों के तेल का कारोबार 30 फीसदी तक बढ़ जाता है। इस समय यह धंधा खूब चल रहा है।ं

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