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मसाले की खेती में जुटे परबत्ता के किसान

सुशासन की सरकार ने परबत्ता प्रखंड के किसानों के मानस में इतना बदलाव ला दिया है कि वे पुश्तैनी खेती को छोड़कर औषधीय, मसाला, फूलों समेत सुगंधित पौधों को उगाने में लगे हुए हैं। प्रखंड के चुनिंदा प्रयोगधर्मी किसानों में एक नाम कुल्हड़िया निवासी भूषण तिवारी का है जो अपनी पुश्तैनी केले की ख्ेाती को छोड़कर अपने एक एकड़ खेत में मसाले की फसल लगा रहे है।ड्ढr ड्ढr मंगरैला फसल की राजेन्द्र श्यामा प्रभेद उनकी खेत में लहलहा रही हैं। अभावों से जूझते हुए खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाकर श्री तिवारी ने न केवल अपनी किस्तम बदली बल्कि गांव के दर्जनों किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाकर लाभ कमाने को प्रेरित कर रहे हैं। गोहन दास कृषक क्लब कुल्हड़िया का गठन करके दर्जनों किसान उनके नक्शे कदम पर चल निकले हैं।ड्ढr ड्ढr इनलोगों ने अपने-अपने खेतों में सिर्फ जैविक खाद डालने की प्रतिज्ञा ली है। श्री तिवारी भी मात्र 10 क्िवंटल बर्मी कम्पोस्ट खेतों में डालकर मंगरैला फसल उगाने में सफल हुए हैं। वे बताते है कि अक्टूबर में उन्होंने अपनी खेत में मंगरैला लगाई जिसकी कटाई मार्च में हो जाएगी। इसके बाद मैंथा की खेती की जायेगी। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में कम से कम 6 से 7 क्िवंटल की ऊपज होगी। इस खेती में मात्र दो हजार रुपये खर्च हुए है जबकि प्रति एकड़ 12 से 13 हजार रुपये बचत होने की संभावना है। जिलास्तरीय उद्यान पंडित प्रतियोगिता में उन्हें करेला, नेनुआ, आेल, गेंदा में प्रथम स्थान तथा गुलाब एवं गुलदाउदी फूलों में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। वे बताते है कि जैविक खाद और परंपरागत कीटनाशकों का उपयोग अधिक कारगर हैं। ख्ेाती-बारी में 20 वषरे से जुटे श्री तिवारी पिछले कुछ वषरे से नई-नई फसलें उगाकर दूसरे किसानों को अपनी सोच में बदलाव लाने की आेर प्रेरित कर रहे हैं।ं

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