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सारे के सारे निर्विरोध निर्वाचित

निर्दलीय प्रत्याशी के नाम वापस लेने के साथ ही विधान परिषद के लिए जदयू, भाजपा, राजद और कांग्रेस के सभी नौ प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिये गये। राज्यसभा के लिए 26 मार्च को वोटिंग होगी। हालांकि मोतिउर्रहमान के निधन से रिक्त हुई राज्यसभा की सीट के लिए जदयू के डॉ. एजाज अली निर्विरोध चुन लिये गये हैं। डॉ. अली व परिषद के नौ प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र भी मिल गये।ड्ढr ड्ढr हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर निर्दलीय प्रत्याशी सैयद महमूद अशरफी ने अपना नामांकन तो वापस लिया ही, बकायदा जदयू में शामिल भी हो गये। श्री अशरफी के इस कदम से निर्दलीय विधायकों को करारा झटका लगा है। उनके प्रस्तावक लालबाबू राय ने तो मुख्यमंत्री के साथ ही राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। जदयू के हारुण रसीद, हीरा बिन्द, सतीश कुमार वरामधनी सिंह, भाजपा के गिरिराज सिंह व कामेश्वर चौपाल, राजद के बादशाह प्रसाद आजाद व तनवीर हसन और कांग्रेस की डॉ. ज्योति की निर्विरोध जीत की घोषणा कर दी गयी। राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी सह विधानसभा के सचिव सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा ने डॉ. अली के साथ-साथ विधान परिषद के नौ प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र दे दिये। दूसरी ओर राज्यसभा की पांच सीटों के लिए छह प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 26 मार्च को होगा। जदयू से शिवानन्द तिवारी, एन.के.सिंह, भाजपा से डॉ. सी.पी. ठाकुर, राजद से प्रेमचन्द्र गुप्ता, लोजपा से साबिर अली और निर्दलीय प्रत्याशी गोविन्द पाण्डेय मैदान में हैं।ड्ढr ड्ढr परिषद के चुनाव में श्री अशरफी के प्रस्तावक बने लालबाबू राय ने कहा कि लालू, नीतीश और पासवान ने मिलकर उच्च सदन की सीटें बांट ही लीं। सिर्फ वोटिंग का नाटक होता है। लगता है कि मुख्यमंत्री को हार का डर था। इसीलिए अधिकारियों और कुछ नेताओं की मदद से निर्दलीय उम्मीदवार पर दबाव डालकर नाम वापस कराया गया है। यह लोकतंत्र के लिए घातक प्रवृत्ति है। श्री राय ने वायसी के विधायक सैयद रुकनुद्दीन की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।ड्ढr दूसरी ओर नाम वापस लेने के बाद श्री अशरफी ने कहा कि मुख्यमंत्री नेक इंसान हैं और राज्य के विकास के लिए सार्थक पहल कर रहे हैं। लिहाजा वे चुनाव लड़कर कोई विवाद नहीं पैदा करना चाहते। मुख्यमंत्री ने उनसे संपर्क किया तो वे फौरन नाम वापस लेने को राजी हो गये। इस बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सैयद महमूद अशरफी जदयू के साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखते हैं। हम व्यक्ित की अच्छाइयों को देखते हैं। जैसे ही मुझे पता चला कि श्री अशरफी हाफिज और मौलवी हैं, मैंने विधायक सैयद रुकनुद्दीन के जरिए उनसे तुरंत संपर्क किया तो वे नाम वापसी को राजी हो गये। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने उन्हें दल में शामिल कराया।

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