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सियासी गुल खिलाने की तैयारी में ‘तिकड़ी’

लोकसभा के मध्यावधि चुनावों की अटक लों के मद्देनजर इन दिनों केन्द्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, रसायन एवं उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान और समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बढ़ती नजदीकियां एक नए मोर्चे की कवायद सरीखी लग रही हैं। वर्ष 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के गठन के बाद रेल मंत्री की कुर्सी संभालने वाले लालू और पासवान के बीच पैदा हुई खटास तो जगजाहिर है। लेकिन अब ये दोनों नेता पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के करीब आने में कोई बुराई नहीं समझ रहे हैं। आलम यह है कि रेल मंत्री ने सांसद मोतियुर रहमान की मौत के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट के चुनावों के लिए अपनी पार्टी का कोई उम्मीदवार न उतारकर लोक जनशक्ित पार्टी के उम्मीदवार सबीर अली को समर्थन देने का मन बनाया है। शायद यही वजह है कि पासवान ने भी लालू की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखते हुए राजन प्रसाद को चुनावी मैदान में नहीं उतारा है। इसी प्रकार संसद में मुलायम के भाई राम गोपाल यादव से भी आजकल लालू से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। वैसे तो इन दलों के नेता नए समीकरणों के बारे में कुछ भी बात करने से बच रहे हैं, लेकिन जानकारों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इन तीनों के आपसी संबंधों को मधुर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।ड्ड

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