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तिब्बत में नहीं थमा विरोध, हुई धरपकड़ तेज

तिब्बत में जारी आजादी समर्थक आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के उद्देश्य से चीन ने तिब्बत व उससे सटे प्रांतों में और सेना भेजने के साथ ही धरपकड़ अभियान तेज कर दिया है। तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पिछले दिनों हुए दंगों के सिलसिले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए चीन ने कहा है कि वह तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा से इस मसले पर सीधी वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते वह अपने रुख में बदलाव लाकर इसके लिए उपयुक्त माहौल बनाएं। दलाई लामा ने भी कहा है कि वह चीन के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं। तिब्बत डेली के अनुसार तिब्बती अधिकारियों ने गुरुवार को 24 संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की है। इन लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, मारपीट, लूट, आगजनी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए चीन ने तिब्बत व आसपास के इलाकों की तरफ जो सेना भेजी है, वह 10 मार्च को शुरू हुए आंदोलन के बाद से अब तक सबसे बड़ी तैनाती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 400 ट्रूप कैरिअर व अन्य वाहनों को ल्हासा की तरफ के मुख्य मार्ग से गुजरते देखा गया। उधर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किन गैंग ने कहा, ‘हम दलाई लामा से अनुरोध करते हैं कि वह तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग स्वीकार करें और स्वतंत्रता संबंधी गतिविधियां रोक दी जाएं ताकि बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल बन सके।’ दूसरी तरफ, धर्मशाला से निर्वासित तिब्बती सरकार की कमान संभाले दलाई लामा ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह चीन के नेताओं से बातचीत के लिए तैयार हैं और एक बार ल्हासा में प्रदर्शन थम जाए तो इसके लिए बीजिंग जाने को भी तैयार हैं। दलाई लामा ने कहा कि वह राष्ट्रपति हू जिंताओ से मिलने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने दुनियाभर के नेताओं से अपील की कि चीन पर तिब्बत में जारी समस्या को बातचीत के जरिये सुलझाने के लिए दबाव बढ़ाएं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने वालों पर चीन की हिंसक कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता भी जताई।ं

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