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तय हो गई भारतीय हॉकी में चार्ल्सवर्थ की भूमिका

पिछले चार दिनों से चला आ रहा बैठकों का दौर आखिर समाप्त हो गया। इसी के साथ भारतीय हॉकी में रिक चार्ल्सवर्थ की भूमिका भी तय हो गई। ऑस्ट्रेलिया के इस स्टार को भारतीय हॉकी का तकनीकी एडवाइजर और एक्सपर्ट कोच नियुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं उनका सीनियर टीम के साथ जुड़ने भी तय हो गया। केपीएस गिल को छोड़ कर शायद हर कोई चाहता था कि भारतीय हॉकी का चार्ज अब चार्ल्सवर्थ को सौंप दिया जाए। और हुआ भी ऐसा ही। ऐसा लगता है जैसे आईएचएफ अध्यक्ष को खेल मंत्रालय के सामने झुकना पड़ा। चौथे दिन सबसे पहले खेल मंत्रालय और आईएचएफ के शीर्ष अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में ही चार्ल्सवर्थ की भूमिका और उनके कांट्रेक्ट का अंतिम रूप दे दिया गया। खेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चार्ल्सवर्थ का कांट्रेक्ट फाइनल हो गया है और उनके सीनियर पुरुष हॉकी टीम के साथ भी जुड़े रहने का रास्ता भी साफ हो गया है। सूत्र के अनुसार, ‘कांट्रेक्ट फाइनल हो गया है। चार्ल्सवर्थ भारतीय हॉकी के हर स्तर पर तकनीकी सलाहकार और विशेषज्ञ कोच के रूप में काम करेंगे।’ इस फैसले से पूर्व ओलंपियन मोहम्मद शाहिद काफी खुश नजर आए। उन्होंने बनारस से फोन पर बताया, ‘मुझे यह नहीं समझ आ रहा कि यह फैसला लेने में इतने दिन क्यों लग गए। देर आए दुरुस्त आए। अब जो कलंक भारतीय हॉकी पर लग गया है उसे भूल कर नई शुरुआत करनी की जरूरत है। हॉकी की प्रतिष्ठा को फिर से वापस लाना होगा और मुझे पूरा विश्वास है कि चार्ल्सवर्थ इसके लिए सबसे योग्य व्यक्ित साबित होंगे।’ ओलंपिक जगबीर भी इस फैसले से खुश नजर आए। उन्होंने कहा, ‘चार्ल्सवर्थ की सेवाएं हर रूप में और हर लेवल पर भारतीय हॉकी के लिए फायदेमंद रहेंगी और मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं। हां, अभी देखना यह है कि जोकिम कारवाल्हो का क्या रोल रहता है।’ इससे पहले सीनियर टीम के साथ न जोड़े जाने के चलते चार्ल्सवर्थ में भारत छोड़ने का मन बना लिया था। उस समय चार्ल्सवर्थ ने कहा था, ‘मैं यहां जूनियर के साथ काम करने नहीं आया हूं।’ इसके बाद आईएचएफ पर चारों ओर से दबाव बनना शुरू हुआ। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ, पूर्व ओलंपियन और यहां तक कि आईएचएफ के कार्यकारिणी सदस्यों ने भी चार्ल्सवर्थ को सीनियर टीम के साथ जोड़ने का दबाव डाला। अब सवाल यह उठता है कि कोच जोकिम कारवाल्हो का क्या होगा। आईएचएफ इसका भी कोई न कोई हल निकाल ही लेगा। उम्मीद है कि कारवाल्हो को भी चार्ल्सवर्थ के साथ जोड़े रखा जाए। हां, कल जो मीटिंग हुई थी उसमें तो ज्यादातर कार्यकारिणी सदस्यों ने कारवाल्हो को हटाकर चार्ल्सवर्थ को उनके स्थान पर सीनियर टीम का कोच बनाए जाने की वकालत की थी। हां, गिल साहब चाहते थे कि कारवाल्हो को अभी हटाया न जाए। अगले माह टीम को ऑस्ट्रेलिया में चारदेशीय टूर्नामेंट में जो हिस्सा लेना था। कार्यकारिणी के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘ज्यादातर सदस्य यही चाहते थे कि चार्ल्सवर्थ को टीम का चार्ज दे दिया जाए। लेकिन उनके यह समझ में नहीं आ रहा था कि गिल कारवाल्हो का बचाव करने में क्यों लगे थे।’ कारवाल्हो ने चिली में भारत की हार का कारण खराब अम्पायरिंग बताया था लेकिन कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा था कि कारवाल्हो खुद के बचाव के लिए शायद ऐसा कह रहे थे। सूत्र के अनुसार, ‘वे यह तो मान नहीं रहे थे कि हम खराब खेले और हार गए। इसके बजाय इस तरह की बातें कर रहे हैं।’ अजरुन हलप्पा और संदीप सिंह जैसे खिलाड़ियों को चिली गई भारततीय टीम में क्यों नहीं रखा गया। इस बारे में भी मीटिंग में विचार-विमर्श हुआ। चयन समिति को क्यों दरकिनार कर दिया गया ये सवाल भी मीटिंग में उठा था।

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  • Web Title: तय हो गई भारतीय हॉकी में चार्ल्सवर्थ की भूमिका