DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चूरन बेच रहे हैं शहीद टर्िी सिंह के घर वाले

अंग्रेजों से वर्ष 1में लोहा लेने और अपनी जान गँवाने वाले शहीद टर्िी सिंह के घरवाले आज किस हालत में हैं, सुनकर आप चौंक जाएँगे।ड्ढr यह एक त्रासद कथा है, जिसमें बाबा-पिता की कुर्बानी के एवज में घरवालों को मिला सिर्फ पिछड़ापन, अशिक्षा और गरीबी। शहीद के पोते आज गाँव-गाँव घूमकर चूरन बेच रहे हैं, 30 से 40 किमी. तक रोज साइकिल का सफर और कमाई मात्र 25 से 30 रुपए। इन्हीं पैसों से चल रहा हैं स्व. टर्िी सिंह के घरवालों का खर्च। एक पोता सहालग में लाउडस्पीकर बजाता है। इतना ही नहीं टर्िी की दो बेटियों के हाथ पीले करने में भी सरकार से मदद की आस थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ और पत्नी को पैतृक भूमि बेचकर विवाह निपटाने पड़े। सरेनी कस्बे में 18 अगस्त 1ो अंग्रेज सिपाहियों ने थाने के सामने क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई थीं, जिसमें पाँच लोग शहीद हो गए थे। इसमें सुर्जीपुर मजरे सोतवा खेड़ा गाँव के टर्िी सिंह उर्फ रामप्यारे सिंह भी थे। ये अपने एक साथी सुरजू को छुड़ाने के लिए थाने गए थे। शहादत के वक्त टर्िी के बड़े पुत्र दुर्गा की उम्र महज पाँच साल और छोटे पुत्र देवी की उम्र तीन साल थी। दो बेटियाँ रानी व शिवदुलारी भी थीं।ड्ढr शहीद के बड़े बेटे दुर्गा सिंह बताते हैं कि वक्त गुजरा और दोनों बहनों के हाथ पीले करने का समय आ गया। माँ कौशल्या सोच रही थीं कि पुत्रियों की शादी के लिए सरकार मदद करेगी, पर जब समय बीतने लगा, तो माँ का धैर्य टूट गया और टर्िी की पैतृक भूमि बेचकर दोनों बेटियों के हाथ पीले किए गए।ड्ढr टर्िी सिंह के शहीद होने के बाद उनका परिवार अनाथ हो गया और गरीबी ने उनके परिवार की कमर तोड़ दी। इस कारण बाद की पीढ़ियाँ पढ़-लिख भी नहीं पाईं। बड़े बेटे दुर्गा सिंह खुद ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं और गरीबी से उनके तीनों बेटे भी औसत दर्जा ही पढ़े हैं। शहीद टर्िी का बड़ा पोता राजेश सिंह कक्षा चार, मँझला रामशंकर सिंह संस्कृत विद्यालय से हाईस्कूल और सबसे छोटा उमाशंकर कक्षा 8 तक ही पढ़ा है। शहीद की प्रपौत्री प्रतिभा सिंह पिछले दो साल से घर में बैठी है। श्री सिंह ने बताया कि दोनों बेटे राजेश सिंह व रामशंकर सिंह गाँव-गाँव, स्कूल-स्कूल जाकर चूरन बेचते हैं। ये चूरन वे घर में ही बनाते हैं। सहालग में रामशंकर लाउडस्पीकर बजाकर अतिरिक्त कमाई कर लेता है। दुर्गा सिंह के पास इस समय 2 बीघा 11 विस्वा जमीन है। खेती अक्सर सूखा व पाला-पत्थर की भेंट चढ़ जाती है। वह कहते हैं कि सरकार ने एक बार इंदिरा आवास बनवाने के लिए 10 हजार रुपए दिया था। यह रकम कमरे के लिए पर्याप्त नहीं थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: चूरन बेच रहे हैं शहीद टर्िी सिंह के घर वाले