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स्वदेशी इंजन से ‘निशांत’ की पहली उड़ान

भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपने मानव रहित विमान (यूएवी) के लिए खुद का इंजन विकसित किया है और इस इंजन के बल पर यूएवी निशांत ने सफलतापूर्वक उड़ान भर ली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के सूत्रों ने बताया कि देश में ही डिजाइन और विकसित किए गए वैंकल इंजन के बल पर निशांत की पहली उड़ान कोलार से 8 किलोमीटर दूर छोटे से गांव वीरापुर में हुई, जहां एक द्वितीय विश्व युद्ध के समय वीरान छोड़ा गया एक रनवे है। इसी रनवे से मानव रहित विमान अपनी ऐतिहासिक उड़ान पर 31 मार्च को रवाना हुआ और धरती से 1800 मीटर की ऊंचाई पर 40 मिनट तक मंडराता रहा। सूत्रों ने बताया कि इसे सूखी मुडवाडी झील के ऊपर उतार लिया गया। इस मौके पर इंजन एवं मानव रहित विमान के विकास से जुड़े तमाम शीर्ष वैज्ञानिक मौजूद थे। इनमें एयरोनोटिकल डेवलपमेंट एस्टाब्लिशमेंट पी एस कृष्णन, नेशनल एयरोनोटिक्स लिमिटेड के निदेशक डॉ. एआर उपाध्याय और विभिन्न रक्षा संगठनों के बड़े अधिकारी शामिल थे। देश में बनाया यह वैंकल इंजन 30 किलो का है और इसमें वजन के हिसाब से ताकत का अनुमात सिंगल रोटर श्रेणी में सबसे अधिक है। यूएवी में देश के इंजन की कामयाबी से काम करने के बाद रक्षा वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि निशांत के मौजूदा आयातित इंजन को हटाकर यह इंजन लगा दिया जाएगा। निशांत के परीक्षण पूरे हो चुके हैं और अब इसे भारतीय सेना को सौंपे जाने की तैयारी चल रही है।

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  • Web Title: स्वदेशी इंजन से ‘निशांत’ की पहली उड़ान