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कांग्रेस-राजद के फैसले का इंतजार

सूबे में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान तेज हो चला है। बुधवार को नाम वापसी का दिन भी निकल गया। यूपीए की ओर से किसी एक नाम पर अब तक सर्वानुमति नहीं बन पायी है। तीनों निर्दलीय प्रत्याशी यूपीए के वोटों के आधार पर ही जीत की दावेदारी कर रहे हैं। झामुमो के शिबू सोरेन ने किशोर लाल को यूपीए का प्रत्याशी घोषित कर रखा है, लेकिन कांग्रेस के प्रदीप बलमुचू और राजद की अन्नपूर्णा देवी ऐसा नहीं मानते। दोनों दलों के विधायकों को अपने आलाकमान के दिशा-निर्देश की प्रतीक्षा है। कांग्रेस-राजद के स्टैंड पर सबकी नजर है। इधर निर्दलीय प्रत्याशी घूम-घूमकर विधायकों से समर्थन जुटाने में भिड़े हैं। उधर एनडीए के जेपीएन सिंह की जीत के लिए एनडीए की बैठक में इंटैक्ट रहने का संकल्प लिया गया। चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त की चर्चा से राजधानी का बुद्धिजीवी जमात उद्वेलित है और विरोध में राजभवन मार्च करने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 24 को राजभवन मार्च करेंगे बुद्धिजीवीड्ढr रांची (सं)। रास चुनाव में विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए, रांची के बुद्धिजीवियों ने इसका कड़ा विरोध किया है। जो परिदृश्य उत्पन्न हुआ है, उससे सभी आहत हैं और इसके विरोध में 24 मार्च को राजभवन मार्च करने का फैसला लिया है। इस सिलसिले में बुधवार को कोकर औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन कार्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया। 24 मार्च को होनेवाले इस कार्यक्रम के तहत अपराह्न् तीन बजे सभी सदस्य सैनिक मार्केट परिसर में जमा होंगे। वहां से राजभवन जायेंगे। मार्च के दौरान तमाम जनता को जानकारी दी जायेगी कि रास चुनाव के नाम पर किस प्रकार से खरीद-फरोख्त चल रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुएरामदयाल मुंडा ने कहा कि राज्य की राजनीति में तेजी से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। इसके विरोध में बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और मीडिया के लोगों को आगे आना होगा। आनेवाले दिनों में इस प्रकार के और भी कार्यक्रम किये जाने पर भी सहमति बनी। बैठक में डॉ संजय बसु मल्लिक, विकास सिंह, आरपी साही, रंजीट टिबड़ेवाल, डॉ रविभूषण, डॉ बीपी केसरी, जेवियर कुजूर, रमेश शरण, अलेक्स एक्का, कुमार संजय इश्वरी प्रसाद, जीपी वर्मा, विनोद पोद्दार सहित कई सदस्य उपस्थित थे। एनडीए को इंटैक्ट रखने की कवायदड्ढr राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए को इंटैक्ट रखने की जी-तोड़ कोशिश शुरू हो गयी है। मंगलवार को जहां पार्टी कार्यालय में भाजपा विधायकों की बैठक हुई, बुधवार को पुत्कर हेंब्रम के आवास पर एनडीए विधायकों की। इसमें खाना-पीना तो हुआ ही एनडीए में एकजुटता बनाये रखने पर भी बल दिया गया। विधायकों से एनडीए की प्रतिष्ठा बचाने की भी अपील की गयी। याद दिलाया गया कि अगर कोई भी विधायक इधर से उधर हुआ तो राज्य में एनडीए की भी वही स्थिति होगी जो आज यूपीए की हो रही है। पूरा झारखंड यूपीए की तरह एनडीए विधायकों को भी बिकाऊ की संज्ञा देगा। जानकारी के अनुसार बुधवार की बैठक में भाजपा के जहां 21 विधायक उपस्थित हुए, वहीं गुरुवार की बैठक में एनडीए के 25 विधायक। प्रतिपक्ष के नेता अजरुन मुंडा दिल्ली चले जाने की वजह से और कड़िया मुंडा किसी अन्य व्यस्तता की वजह बैठक सह भोज में शामिल नहीं हुए। जदयू की ओर से भी केवल राधाकृष्ण किशोर ही पहुंचे। भाजपा के अन्य विधायकों में पीएन सिंह, सीपी सिंह, सरयू राय, ताला मरांडी, समीर उरांव, कोचे मुंडा, नीलकंठ सिंह मुंडा, छत्रुराम महतो, चितरंजन यादव, सत्यानंद भोक्ता, केदार हाजरा, राज पालिवाल, प्रो यदुनाथ पांडेय, गणेशी लाल और किसान मोरचा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र पाठक बैठक में शामिल थे।ड्ढr इस बीच, रास चुनाव में एनडीए प्रत्याशी जेपीएन सिंह अपनी जीत को ले आश्वस्त हैं। अपने दल और सहयोगी दलों के अलावा झारखंड की माटी से जुड़े दलों से भी उन्हें समर्थन की पूरी उम्मीद है। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में जेपीएन सिंह ने कहा- मुझे भाजपा और जदयू के सभी विधायकों के अलावा दूसरे दलों के विधायकों का भी समर्थन मिलेगा। मैं झारखंड का रहनेवाला हूं। मुझे किसी से मिलने में क्या उज्र हो सकता है। सबसे मिल रहा हूं और सहयोग मांग रहा हूं। दिल्ली के उम्मीदवारों के कारण हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका तो है लेकिन झारखंड के अधिकतर विधायक राज्यहित में दल और संगठन से ऊपर उठकर मेरे पक्ष में जरूर मतदान करेंगे। झारखंड की लाज बचाने के लिए दिल्लीवालों को उचित नसीहत जरूर देंगे। अपने दल के नेताओं के साथ लगातार बैठक और संपर्क में जुटा हूं। गुरुजी लाये, वही जितायेंगे: लालड्ढr किशोर लाल अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। होली की छुट्टी के कारण वह बुधवार को दिल्ली चले गये और अगले हफ्ते लौटेंगे। लाल ने कहा कि वह यूपीए के उम्मीदार हैं। वह दिल्ली जरूर जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस और राजद से झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ही बात करंेगे। लाल ने कहा कि कांग्रेस और राजद ने उम्मीदवार तय करने का अधिकार शिबू सोरेन को दे दिया था। अपना उम्मीदवार न देने की घोषणा करते हुए दोनों दलों ने कहा था कि शिबू सोरेन जिसको खड़ा करेंगे वही यूपीए का उम्मीदवार होगा। कांग्रेस और राजद के स्टैंड को देख ही उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। लाल ने कहा कि उनकी सीपीआइ के वरिष्ठ नेता एबी र्बन से भी बात हुई है और ुउन्होंने अपने दल का समर्थन देने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में उन्होंने झारखंड स्थित दल के नेताआें को निर्देश भी दे दिया है। उधर, झामुमो के महासचिव दुर्गा सोरेन ने कहा है कि रास चुनाव में झामुमो के सभी विधायक पार्टी के साथ हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि पार्टी के विधायक यूपीए उम्मीदवार किशोर लाल का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि विधायक गड़बड़ी करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। ड्ढr यूपीए विधायक साथ : आनंदड्ढr दो दिन दिल्ली में रहने के बाद राज्यसभा के निर्दलीय प्रत्याशी आरके आनंद 1मार्च को रांची पहुंचे। रांची पहुंचते ही वह सीधे विधायकों से संपर्क कर उन्हें अपने पक्ष में करने की मुहिम में जुट गये। इसी कड़ी में वे बुधवार को कांग्रेस विधायक नियेल तिर्की के आवास गये, वहां विधायक सुखदेव भगत और गोपाल शरण नाथ शाहदेव भी मौजूद थे। उन्होंने इन सभी विधायकों से समर्थन की अपील की। अपनी जीत के प्रति आश्वस्त आनंद ने कहा कि उन्हें यूपीए के विधायकों का समर्थन प्राप्त है। मतदान के बाद स्वत: सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा। दिल्ली में कई नेताओं से उनकी बातचीत हुई है। आनंद कहते हैं कि बोकारो के होटल हंस में झामुमो के विधायकों ने प्रस्तावक के रुप में उनके पक्ष में हस्ताक्षर किया। अब यह कहना गलत है कि पुराने हस्ताक्षर का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीए की ओर से दुर्गा सोरेन को उम्मीदवार बनाने की बात कही गयी थी। वह नामांकन के दिन अपराह्न् दो बजे तक दुर्गा का इंतजार करते रहे। जब उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया, तब दिल्ली के नेताओं की स्वीकृति से नोमिनेशन किया है। वह दिनभर विधायकों से ही संपर्क साधते रहे। देर शाम अपने कुछ समर्थकों के साथ उन्होंने होटल में केक भी काटा। 1मार्च को आनंद का जन्मदिन जो है। जीत पक्की, 30 वोट मिलेंगे: नाथवाणीड्ढr निर्दलीय परिमल नाथवाणी के हौसले बुलंद हैं। चुनाव को लेकर चल रही हॉर्सट्रेडिंग की छिछालेदर से बेपरवाह नाथवाणी बेलौस कहते हैं- मेरी जीत पक्की है। जीतने की प्रथम वरीयता के लिये 28 वोट चाहिए, जबकि मुझे मिल रहे हैं, 30 वोट। कहां से? इस खुलासे से इंकार करते हुए वह अपनी छवि और उपलब्धियों को सामने करके कहते हैं- मैं यहां खुद नहीं आया। यहां के लोगों ने मुझे बुलाया है। वे चाहते हैं कि झारखंड में गुजरात जैसी तरक्की हेा। नाथवाणी की मानें तो वह अबतक रांची और आसपास में 52 विधायकों से मिल चुके हैं। वह कहते हैं कि एक निर्दलीय प्रत्याशी होने के नाते किसी भी दल के विधायक-नेता से मिलने में उन्हें न कोई संकोच है और न पूर्वाग्रह। वह अपनी प्रोफाइल रखते हुए वोट मांगते हैं। वह कहते हैं कि मेरी कार्यप्रणाली और उपलब्धि देखना है तो गुजरात के छह हजार गावों में देखिये, जहां हमलोगों ने कायाकल्प कर दिया है। नाथवाणी खुद को अंबानी परिवार का सदस्य बताते हैं। वह कहते हैं कि ग्रूप प्रेसिडेंट का पद तो केवल दुनियावालों को आसानी से समझाने के लिये एक औपचारिकता भर है। गुजरात में रिलायंस का सारा काम उन्हीं के जिम्मे है। मुकेश अंबानी के सबसे नजदीकी (मुकेश अंबानी के बाद ग्रूप में सबसे शक्ितशाली व्यक्ित) मनोज मोदी उनके रिश्तेदार हैं। वह कहते हैं कि झारखंड में मैं कोई भौतिक अर्जन के लिये नहीं आया। एक महत्वाकांक्षा है कि किसी प्रदेश के निर्माण में मेरा योगदान हो। झारखंड में असीम संभावनाएं हैं, बस रणनीति के तहत पहल करने की जरूरत है। मौका मिला तो करके दिखाउंगा।ड्ढr रांची (हिब्यू)। सारे अनुमान और आकलन को दरकिनार करते हुए राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करनेवाले तीन निर्दलीयों में किसी ने भी अपना नाम वापस नहीं लिया। बुधवार को नाम वापसी का अंतिम दिन भी बीत गया।ड्ढr इसके साथ ही दो सीटों के लिए निर्विरोध चुनाव की बची-खुची संभावनाएं भी खत्म हो गयी। तीनों निर्दलीय उम्मीदवार ताल ठोक कर एक-दूसरे को चुनौती देने की स्थिति में हैं। सबसे दिलचस्प है कि तीनों ही यूपीए खेमे से चुनाव जीतने की दावेदारी कर रहे हैं। उधर, एनडीए की ओर से मैदान में खड़े भाजपा के जेपीएन सिंह अपनी स्थिति को मजबूत करने की कवायद में जुटे हुए हैं। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी, किशोर लाल और आरके आनंद को अपने भाग्य के साथ-साथ यूपीए के विधायकों पर सबसे अधिक भरोसा है। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता में कम से कम 28 वोट चाहिए होंगे। 28 वोट पाने की दौड़ में तीनों भिड़े हुए हैं। वैसे वाम दलों के विधायकों ने स्पष्ट कर दिया है वे किसी को वोट नहीं करेंगे। अभी फाब्ला विधायक ने अपने निर्णय का खुलासा नहीं किया है। कांग्रेस और राजद विधायकों को अपने आलाकमान के आदेश की प्रतीक्षा रहेगी, जबकि झामुमो के सुप्रीमो शिबू सोरेन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके अधिकृत प्रत्याशी किशोर लाल होंगे। शिबू सोरेन यह भी लगातार कह रहे हैं कि किशोर लाल ही यूपीए के अधिकृत प्रत्याशी हैं। लेकिन कांग्रेस और राजद की ओर से इस संबंध में कोई पुष्टि करनेवाली बात सामने नहीं आयी है। ऐसी संभावना दिखायी दे रही है कि तीनों निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच यूपीए मतों को अपने पक्ष में करने के लिए छीना-झपटी जरूर होगी। तीन निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में डटे रहने के कारण भाजपा खेमा बहुत परेशान तो नहीं लेकिन सतर्क जरूर दिखायी दे रहा है। एनडीए की किलेबंदी में कोई सेंधमारी न करे, नेताओं को इसकी चिंता सता रही है।

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