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भृगु का शव पहुंचा गांव

पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार की रात जेट एयरवेज से भृगुनाथ पांडेय का शव पहुंचा। दिल्ली से लाश पहुंचते ही पांडेय के बेटे अविनाश, भांजे मनोज, भतीजे दिव्यानंद, पतोह सुष्मा देवी दहाड़ मारकर रोने लगी। दिल्ली से लाश के साथ भृगु की पत्नी गीता तथा साले रंगेश पांडेय साथ आये। गीता तथा रंगेश के एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही मौजूद परिजन उन लोगों से लिपट कर रोने लगे।ड्ढr रात में ही झारखंड पुलिस की सुरक्षा में शव को उनके पैतृक गांव श्रीचंदपुर, हरनौत, नालंदा ले जाया गया। परिजनों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जायेगा। सचिवालय के वित्त विभाग के कर्मचारी भृगु ने सात मार्च को यूनियन की मांगों को लेकर विधानसभा के समक्ष आत्मदाह कर लिया था। उसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल भेजा था। बावजूद इसके बुधवार की रात वह जीवन की जंग हार गये। लाश लेने पटना एयरपोर्ट पहुंचे परिजनों ने कोड़ा सरकार पर जम की भड़ास निकालते हुए कहा कि आत्मदाह के बारे में तीन माह पहले ही सूचना दे दी गयी थी। यही नहीं घटना के तीन दिन पहले भी सरकार तथा प्रशासन को इसकी सूचना दी गयी पर नतीजा सिफर ही रहा। अविनाश ने फफकते हुए कहा कि पिता की नौकरी पर ही पूरा परिवार निर्भर था। छोटा भाई राहुल नवें में पढ़ता है तथा छोटी बहन की शादी 27 अप्रैल को होने वाली है। अविनाश ने कहा कि एक ही झटके में परिवार पर मुसीबतों को पहाड़ टूट पड़ा है।ड्ढr उधर, अंत्योष्टि में भाग लेने के लिए स्व. पांडेय के बेटे राहुल पांडे उर्फ छोटु सहित अन्य परिजन रांची से हरनौत के लिए रवाना हो गये। इधर साथी कर्मचारी की मौत से दुखी सचिवालय कर्मचारियों ने गुरुवार को कार्य बहिष्कार किया। दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। नेपाल हाउस सचिवालय में कर्मचारी दिनभर सड़कों पर रहे और सचिवालय गेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रोजेक्ट भवन सचिवालय में सबेरे 10 बजे से अपराह्न् दो बजे तक धरना दिया गया। एक बजे सचिवालय के सामने संघ के कर्मचारियों ने जुलूस निकाला और नारेबाजी की। आधे घंटे तक नारेबाजी के दौरान भृगुनाथ पांडेय अमर रहे और राज्य सरकार के खिलाफ बयानबाजी चलता रहा। सचिवालय कर्मियों का रोष उस वक्त बढ़ गया जब उन्हें सूचना मिली कि उनके शहीद साथी भृगुनाथ पांडे का शव दिल्ली से सीधा पटना उनके पैतृक निवास पर ले जाया जा रहा है। इसका जमकर विरोध किया गया। संघ का कहना था कि पहले शव रांची लाया जाये और इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए उनके गांव ले जाया जाये। नेपाल हाउस सचिवालय में कर्मचारियों ने गेट जाम करने का भी प्रयास किया। इस क्रम में कर्मचारियों की सुरक्षा बलों के साथ हल्की हाथा-पाई भी हुई। हालांकि बाद में डीसी अनिवाश कुमार के समझाये जाने के बाद कर्मचारी गेट से हट गये। सचिवालय गेट से करीब 100 मीटर की दूरी कर्मचारियों ने सभा की। इसमें विभिन्न वक्ताओं ने सरकार पर भृगुनाथ पांडेय की इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने सरकार से पांडेय के आश्रितों को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपया मुआवजा देने की मांग की। इस मौके पर कर्मचारियों ने अपने एक दिन का वेतन भृगुनाथ पांडेय के परिजनों के सहायतार्थ देने की भी घोषणा की। साथ ही प्रोजेक्टभवन सचिवालय में पांडेय की आदमकद प्रतिमा लगवाने की भी मांग सरकार से की गयी। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो कर्मचारी स्वयं ही प्रतिमा लगवायेंगे। इसके अलावा प्रति वर्ष 20 मार्च को कर्मचारी शहादत दिवस मनायेंगे। कर्मचारी नेताओं ने 20 मार्च को राजकीय अवकाश घोषित करने की भी मांग सरकार से की। इससे पहले करीब 11 बजे सचिवालय गेट के समक्ष सभी आंदोलनरत चतुर्थवर्गीय कर्मी, सहायक और अन्य संवर्ग के कर्मचारी उपस्थित हुए और भृगुनाथ पांडेय की मौत पर दुख व्यक्त किया। सहायक संवर्ग के कर्मचारियों ने इश मौके पर कार्य बहिष्कार की घोषणा की। इधर एहतियात के तौर पर काफी संख्या में पुलिस बल और रैफ के जवानों की तैनाती सचिवालय में की गयी थी। सभा स्थल को कर्मचारी नेता विद्यानंद विद्यार्थी, घनश्याम रवानी, आदिल जहीर, कृष्णा चौधरी आदि कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया। भृगुनाथ के मामले में विधानसभा ठप भृगुनाथ पांडेय की मौत का मामला गुरुवार को विधानसभा में भी गरमाया रहा। विपक्ष ने सभा की कार्यवाही दिन भर ठप कर दी। हंगामे से प्रश्नकाल, शून्यकाल एवं ध्यानाकर्षण के साथ-साथ पर्यटन विभाग की अनुदान मांग पर वाद-विवाद नहीं हो पाया। स्पीकर को तीन बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। पर्यटन मंत्री हरिनारायण राय ने हंगामे के बीच ही अनुदान मांग पर चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा और उसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। पूर्वाह्न् में स्पीकर के आसन ग्रहण करते ही विधायकों ने इस मामले को उठाया और नारेबाजी शुरू कर दी। सीएम मधु कोड़ा बोलने के लिए खड़े हुये, उन्हें बोलने नहीं दिया गया। स्पीकर बार-बार सरकार का पक्ष सुनने के लिए आग्रह करते रहे। उनके आग्रह को भी विपक्ष ने ठुकरा दिया। विपक्षी विधायक खूनी सरकार इस्तीफा दो, कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर न सके वो सरकार निकम्मी है, कोड़ा सरकार हाय-हाय आदि नारे लगा रहे थे। गतिरोध कायम रहने पर स्पीकर ने पहली बार 11.20 में दस मिनट के लिए, दूसरी बार 11.45 में एक घंटा के लिए तथा इसके बाद भोजनावकाश तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। 2.15 मिनट पर जब सदन फिर बैठी तो भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुये वेल में आ गये। इसके बाद सभा की कार्यवाही 3.45 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। 3.45 बजे स्पीकर के आते ही विपक्ष ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। इस तरह कार्यस्थगन के बाद जब-जब बठक शुरू हुई, विपक्ष हंगामा करता रहा। इस दौरान पक्ष-विपक्ष के विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा। आरोप-प्रत्यारोप में मंत्रिपरिषद के कुछ सदस्य भी शामिल थे। हंगामे के बीच ही पर्यटन विकास विभाग की अनुदान मांग पर सदन की सहमति ली गयी। तत्पश्चात सभा की कार्यवाही 24 मार्च के पूर्वाह्न् 11.00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस मामले को लेकर विधायकांे ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर भी प्रदर्शन किया तथा सरकार विरोधी नारे लगाये।

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