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राजरंग

तेरे दर पर आया हूं, झोली भर दे मेरी.। यह कहना है नगर निगम चुनाव में खड़े प्रत्याशियों का। लेकिन झोली भरेगी कैसे, इसके लिए प्रत्याशियों ने एक मंत्र का इजाद किया है। वह मंत्र है बिजली, पानी और सफाई। इसी मंत्र का वे दिन-रात जाप कर रहे हैं। खास बात यह है कि मंत्र में बहुत शक्ित है। यही वह मंत्र है जिसकी बदौलत उनकी झोली भरेगी। जिसकी झोली भरेगी वह गद्गद् हो जायेगा। साथ ही, देशभक्ित का जज्बा भी इनकी रगों में इन दिनों चरम पर है। यह अलग बात है कि इनके नवोदित राष्ट्रप्रेम के दरिया में खासकर परीक्षार्थियों की पढ़ाई अंतिम सांसें ले रही हैं। इधर गोखुल चचा परेशान हैं कि सफाई वाला मंत्रवा कैसा है, किसकी सफाई होगी। जनता की सफाई होगी कि शहर की। चचा कहते भी हैं कि जीतने पर मानदेय सिर्फ एक हजार रुपया मिलेगा, तो चुनाव प्रचार का खर्चा कैसे निकालेंगे? जीतने के बाद जनता से निकालेंगे या फिर हाथ की सफाई से। फिर वह मंत्र कहां गायब हो जायेगा। किसी को कानों-कान पता भी नहीं चलेगा। काहे कि दुनिया की यही रीत है। राजनीति में जीतने के बाद कोई पूछता है क्या? इसलिए हे जनमानस! किसी की झोली में कुछ डालने से पहले सोचिये, समझिये। नहीं तो पूरी की पूरी सफाई ही हो जायेगी और आपको पता भी नहीं चलेगा।

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