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नबी ने दुनिया को इंसानियत का पैगाम दिया

रबिउल अव्वल इसलामी साल का तीसरा महीना है। यही वह मुबारक महीना है जिसकी 12 तारीख को अल्लाह के लाडले पैगंबर हजरत मोहम्मद (स) दुनिया में तशरीफ लाये। आज पूरी दुनिया में उनकी याद मनायी जाती है। यह महीना पूरी इंसानियत के लिए सआदत और रहमत का है। इसकी 12 तारीख इंसानी तारीख में बड़ी अहमियत रखती है। यह बहुत बरकत वाला दिन है। चौदह सौ साल गुजर जाने के बाद भी जब यह तारीख आती है तो हुजूर की पैदाइश की याद ताजा हो जाती है। रसूल के वालिद का नाम अब्दुल्लाह और मां का नाम बीबी आमना था।ड्ढr हजरत इसा अलैहिस्सलाम की वफात के करीब पांच सौ साल बाद अल्लाह के नबी हजरत मोहम्मद (स) अरब मुल्क के शहर मक्का में पैदा हुए। आप आखरी नबी हैं। अब कयामत तक कोई नबी नहीं आयेगा। नबी पर उतरने वाला कुरआन खुदा की आखरी किताब है। अब कयामत तक कोई दूसरी किताब नहीं आयेगी। खुदा का दस्तुर रहा है कि जब जब इंसानों ने अपने पैदा करने वाले को भुलाया और बुराई व सरकशी का रास्ता अख्तियार किया। खुदा ने इंसानों की भलाई और नहनुमाई के लिए अपने महबूब नबियों को भेजा। सबसे पहले नबी हजरत आदम थे। आपने पूरी दुनिया को इंसानियत का पैगाम दिया। औरतों के साथ अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया। लड़कियों को जिंदा मारने से सख्ती से मना किया। खुदा ने अपने महबूब पैंगंबर को सारी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा।

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