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व्याख्याता नियुक्ित के बाद भी कई विषयों में शिक्षकों की कमी

झारखंड के विश्वविद्यालयों में व्याख्याता नियुक्ित प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि अब भी कई विषयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, क्योंकि कुछ विषयों के रिक्त पदों को सूची में शामिल ही नहीं किया गया है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे बड़ी साजिश है। वे बताते हैं कि एक दशक पूर्व कई लोगों को पिछले दरवाजे से अस्वीकृत पदों पर रखा गया था। अब ऐसे लोगों को स्वीकृत पदों पर सामंजित करने की कोशिश हो रही है। यही कारण है कि कुछ विषयों के रिक्त पदों को छुपा कर जेपीएससी और मानव संसाधन विकास विभाग को अधूरी जानकारी दी गयी है।ड्ढr मालूम हो कि जेपीएससी ने 21 विषयों में व्याख्याताओं की नियुक्ित की है। परंतु भूगर्भशास्त्र, गृहविज्ञान और समाजशास्त्र में कई पद रिक्त हैं। भूगर्भशास्त्र के शिक्षकों का कहना है कि इस विषय में कम से कम दस पद रिक्त हैं। विवि प्रशासन ने मात्र दो पद रिक्त बताया था।ड्ढr जानकारों का कहना है कि समाजशास्त्र, गृहविज्ञान और भूगर्भशास्त्र जैसे विषयों में दशकों पूर्व कई लोगों की अस्वीकृत पदों पर बिना किसी विज्ञापन और साक्षात्कार के नियुक्ित कर दी गयी। अब तक ऐसे लोग अस्वीकृत पदों पर कार्यरत हैं। जबकि विवि के बजट में उक्त विषयों के स्वीकृत पदों के रिक्त होने का जिक्र रहता है। बावजूद इसके जब रिक्त पदों की सूची बनी, तो दर्जनों रिक्त स्वीकृत पदों की सूचना उसमें नहीं दी गयी। इसके पीछे अस्वीकृत पदों पर कार्यरत लोगों को लाभ पहुंचाने की मंशा है, ताकि उन्हें स्वीकृत पदों पर सामंजित किया जा सके। बताया जाता है कि ये सभी किसी न किसी विवि अधिकारी के रिश्तेदार अथवा पहुंचवाले हैं। जानकारी के अनुसार सिर्फ रांची विवि में भूगर्भशास्त्र के दस, समाजशास्त्र के लगभग 12 एवं गृहविज्ञान के 10 व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं।

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