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जल संचयन पर विक सित देशों की तकनीक अपनायेगा झारखंड

झारखंड में वाटर लेवल काफी तेजी से नीचे जा रहा है। यह खतरनाक है। बिना पेट्रोल के हमारा काम चल सकता है, हम पैदल चल सकते हैं, पर पानी नहीं रहेगा तो क्या होगा। इस खतरे पर सारी दुनिया की निगाहें हैं। हमें भी सतर्क होने की जरूरत है। विभाग ने जल संचयन पर विकसित राष्ट्रों की उन्नत तकनीक अपनाने की योजना बनायी है।ड्ढr उक्त बातें जल संसाधन मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने इंजीनियर्स भवन में सामेकित जल संसाधन विकास प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं। कमलेश सिंह ने कहा कि केंद्रीय जल बोर्ड विकसित राष्ट्रों की जल संचयन नीति को झारखंड में लाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाये। झारखंड सरकार उसमें हर संभव मदद करेगी।ड्ढr मंत्री ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान विभागीय अधिकारियों के सहयोग से सिंचाई का प्रतिशत 8 से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। मंत्री ने कहा कि सिंचाई सुविधाआें को जन-जन तक पहुंचाने में विभाग की सबसे बड़ी परेशानी वन विभाग की है। विस्थापितों और पुनर्वास के मामले में भी सरकार को आये दिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।ड्ढr खूंटी में सरकार ने सिंचाई परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए डैम का निर्माण कराने का निर्णय लिया है। राज्य के सभी अभियंताआें को सरकार की रेन वाटर हारवेस्टिंग योजना को अमलीजामा पहनाने में सक्रिय रूप से जुड़ने का निर्देश दिया गया है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में जल संसाधन विभाग के सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं, लेकिन हमें उनका डटकर मुकाबला करना है। सेमिनार को संबोधित करते हुए विभागीय सचिव डीके तिवारी ने कहा कि पानी को प्रदूषण का खतरा है। दामोदर नदी का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। पेड़-पौधे को भी बचाना होगा। आद्यौगिकरण की मांग भी जल है। पिछले 25 वर्ष से लगातार तालाब, नदियां और पोखर सूखते जा रहे हैं। ऐसे में हमें पानी के मूल्य को समझना होगा।

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