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पीड़ित भारतीय कामगारों से मिलेंगे रोनेन सेन

अमेरिका के एक जहाज निर्माण कारखाने के खिलाफ शोषण का आरोप लगाने वाले करीबन 100 भारतीय श्रमिकों के ‘वाशिंगटन मार्च’ के कारण राजदूत रोनेन सेन उनसे मिलने को राजी हो गए हैं। उन्होंने इन श्रमिकों को मिलने के लिए 26 मार्च का समय दिया है। गौरतलब है कि मिसीसिपी की जहाज निर्माण कंपनी ‘सिग्नल इंटरनेशनल ’ पर र्दुव्‍यवहार का आरोप लगाते हुए करीब 100 श्रमिकों ने इसे छोड़ दिया था। मजदूरों ने भारत सरकार पर उनके हितों की सुरक्षा में असफल रहने का आरोप लगाया। राजदूत सेन से उनकी मुलाकात नहीं होने के बाद इन श्रमिकों ने न्यू ओर्लिएंस से वाशिंगटन तक सत्याग्रह यात्रा शुरू की है। इन श्रमिकों ने जहाज निर्माण कंपनी के खिलाफ न्यू ओर्लिएंस की संघीय अदालत में एक मुकदमा भी दर्ज कराया है। श्रमिकों ने प्रवासी मामलों के मंत्रालय की नई दिी में सिग्नल इंटरनेशनल के अधिकारियों से मुलाकत करने के लिए भी आलोचना की। उन्होंने भारतीय दूतावास द्वारा ोजी गई टीम पर आरोप लगाया कि वह केवल सिग्नल परिसर में काम करने वाले मजदूरों से ही मिल कर लौट गई। श्रमिकों का आरोप है कि भारत और अमेरिका में बिचौलियों ने ग्रीन कार्ड दिलाने का वादा करके उनसे अवैध रूप से 20,000 डालर वसूल लिए।इन श्रमिकों को 10 महीने के लिए एच2बी वीजा दिया गया है और आरोप है कि सिग्नल में उनसे अमानवीय हालात में काम कराया जाता था। भारतीय दूतावास ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि दूतावास के दरवाजे प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए खुले हुए हैं। चाहे फैशन डिजाइनर आनंद जॉन की गिरफ्तारी का मामला हो या देश के अन्य हिस्सों में छात्रों पर हमले की घटनाएं हों, भारतीय दूतावास के अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं।

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