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बजट में पर्यावरण की उपेक्षा

हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा जारी बजट में पर्यावरण की पूरी उपेक्षा की गई है, केवल बाघों के संरक्षण के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति डॉ. अलगोर के साथ इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले देश के डॉ. आर. के. पचौरी के पर्यावरण सुधार सुझावों को भी बजट में नजरअंदाज किया गया है। देश आज गंभीर पर्यावरण संकट से गुजर रहा है एवं पर्यावरण सुधार के प्रयास यदि ईमानदारी से नहीं किए गए, तो देश में कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन गिरेंगे, जिससे भयानक आर्थिक संकट पैदा होगा। कृषि उत्पादन किसानों की कर्ज माफी से नहीं बढ़ेगा, अपितु उसके लिए अच्छी जलवायु, मिट्टी एवं मानसून जरूरी है। मानसून में गड़बड़ होने से वर्षा अनियमित होगी, जिससे विद्युत एवं औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होंगे। कारों की कीमतें बजट प्रावधान के अनुसार कम होने से इनकी बिक्री बढ़ेगी जिसका परिणाम होगा ज्यादा पेट्रोल-डीजल की खपत, यातायात अवरुद्धता एवं प्रदूषण की बढ़ोत्तरी। इसी प्रकार इलेक्ट्रानिक वस्तुआें के सस्ते होने से ई-वेस्ट की समस्या बढ़ेगी। देश की नदियों की हालत सुधारने, उजड़े जंगलों को फिर से लगाने, बाढ़ एवं सूखे से निपटने, हिमालय में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों को बचाने एवं ई-वेस्ट प्रबंधन आदि की कोई भी योजना बजट में नहीं दर्शाई गई है।ड्ढr डॉ. आे. पी. जोशी डॉ. जयश्री सिक्का गुजराती साइंस कालेज, इन्दौर दरो-दीवार पर हल्का होना जीवनशैली की बेहूदगी फुटपाथी स्कूलों, आम-आे-खास रिहायशी क्षेत्र की दरो-दीवारों को एक खुले और विस्तृत पेशाब घर में बदल देना जीवनशैली की बेहूदगी ही नहीं है, अपने ही माहौल, रास्तों के प्रति बे-दिली भी है। क्या आप गाय, बैल, गधा या घोड़ा हैं जो चलते फिरते हल्का होते हैं। विदेशों में ऐसा करने की आप हिमाकत कर सकते हैं क्या? गंदगी तो गंदगी के कीड़ों की पसंद है। आदमी में तो सफाई की एक चेतना भी होती है।ड्ढr वीरेन्द्र शर्मा, 16-18, जोधपुर ऑफीसर्स हॉस्टल, पंडारा रोड, नई दिल्ली मुसलमानों पर अविश्वास क्यों? सुहेल वहीद साहब को मैं धन्यवाद देना चाहूंगा कि आम मुसलमानों से हटकर उन्होंने मुसलमानों से पूछने की हिम्मत जुटाई है कि ‘रिश्ता नहीं आतंकवाद से, तो सफाई क्यों?’ मात्र हिन्दू ही नहीं वरन हर गैर मुस्लिम दिल के कोने में यह शक पाले हुए है कि इस्लाम ही आतंकवाद का जनक है। इसके लिए मुसलमान स्वयं जिम्मेदार हैं। मुसलमानों ने भारत में गैर मुसलमानों पर लगभग 1000 वषरे तक राज किया और अंग्रेजों ने मात्र 200 वषरे तक। क्या यह दलील सही नहीं है कि हिन्दू, यहूदी, ईसाई सभी देश मुसलमानों को मस्जिदें बनाने की अनुमति देते हैं, इसके विपरीत मक्का-मदीना में गैर इस्लामी अपना घर नहीं बना सकता है। भारत के मुसलमानों ने कभी भी दिल से नहीं कहा कि कश्मीर भारत का अंग है। आम हिन्दू नक्सलवादियों से उतनी घृणा नहीं करता, जितना लश्करे तोयबा से करता है। राजनैतिक दल चाहें मुसलमानों का गुणगान करें परंतु आम हिन्दू पारसियों से प्रेम करता है, किन्तु मुसलमानों पर विश्वास नहीं।ड्ढr सेतुपाल सिंह, धूम, दादरी, दिल्लीं

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