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होली को गाढ़ा रंग चढ़ा विज्ञापनों पर

होली के इंद्रधनुषी रंग फिजाओं में भी घुल गए हैं। तो फिर विज्ञापन की दुनिया इससे कैसे दूर या अछूती रह सकती है। अचानक से मोबाइल कंपनी से लेकर बैंक और सरकारी महकमों से लेकर अन्य निजी कंपनियों के विज्ञापनों में भी होली के रंगों की महक का आनंद लिया जा सकता हैं। राजधानी के प्रमुख चौराहे आईटीओ पर आईडीबीआई बैंक और सैमसंग मोबाइल टेलीफोन के दो बड़े विज्ञापन बोर्ड वहां से गुजरने वाले किसी भी इंसान का ध्यान अपनी तरफ बरबस ही खींचते हैं। दोनों में दिखाए गए मॉडलों के चेहरे को रंगा हुआ दिखाया गया है। आईडीबीआई बैंक के विज्ञापन में कैचलाइन है -होली के रंग आईडीबीआई बैंक के संग। सैमसंग के विज्ञापन में होली से जुड़ी कोई खास पंक्ित तो नहीं ह,ै पर विज्ञापन का कुल मिलाकर मिजाज निश्चित रूप से होली के रंग में भीगा हुआ नजर आता है। दिल्ली और मुम्बई में टेलीफोन सेवाएं दे रही महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के विज्ञापन में भी होली सिर चढ़कर बोल रही है। इसमें दो गुलाल से रंगी बालाएं दिखाई दे रही हैं पिचकारियों के साथ। इस विज्ञापन में एमटीएनएल ने अपने ग्राहकों को दी जाने वाली तमाम विशेष योजनाओं का जिक्र किया है। इस क्रम में बीएसएनएल भी पीछे नहीं है। उसने भी होली के लिए अलग से एक विज्ञापन तैयार करवाया। प्रमुख विज्ञापन एजेंसी ग्राफिक्स एड एजेंसी के डायरेक्टर आलोक गुप्ता कहते हैं कि होली और दीवाली ऐसे पर्व हैं जिनसे कोई भी दूर रह नहीं पाता है। इसमें विज्ञापन की भी दुनिया शामिल है। उन्होंने कहा कि किसी पर्व को ध्यान में रखकर बनाए गए विज्ञापनों पर प्राय: विज्ञापन एजेंसियां अधिक खर्चा नहीं करती। कारण यह है कि पर्व गुजरने के साथ ही इनको टीवी या फिर अखबार पर दिखाने का कोई मतलब नहीं रहता। मुम्बई के कुछ अखबारों ने शुक्रवार को सेंट्रल बैंक का पहले पेज पर एक विज्ञापन छापा जिसमें पारसी नववर्ष नवरोज पर बधाई दी गई थी। कहने की जरूरत नहीं है कि चूंकि मुम्बई में पारसी समाज की आबादी खासी है, इसीलिए सेंट्रल बैंक ने नवरोज पर वहां ही एड दिया। दिल्ली में इस तरह का विज्ञापन नहीं दिखा। होली से उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने भी अपने को जोड़ा। उसके विज्ञापन में अवाम को नसीहत देने के अंदाज में कहा गया- होली के रंग नैचुरल कलर के संग। रंगों से भीगा हुआ लगता है यह विज्ञापन भी। एड गुरु प्रसून जोशी ने कहा कि चूंकि होली कमोबेश उत्तर भारत का ही पर्व है तो इससे जुड़े हुए विज्ञापन उत्तर भारत में अधिक तादाद में देखने को मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक प्राय:छोटी कंपनियां ही किसी पर्व के अवसर पर अपने विज्ञापनों में उस पर्व के एंगल को डलवाने के लिए कहती थीं। अब इस सोच ने काफी विस्तार ले लिया है। इसीलिए अब बड़ी कंपनियां भी होली या दीवाली या नव वर्ष पर अलग से अपने विज्ञापन तैयार करवाती हैं।

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  • Web Title: होली को गाढ़ा रंग चढ़ा विज्ञापनों पर