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प्रणव दा की राइस मिलन की रुत आई

शनिवार को दिल्ली में गुलाल खेलने के बाद विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी उसी दिन वाशिंगटन रवाना हो जाएंगे। सोमवार को उनकी विदेशमंत्री कोंडालीजा राइस से मुलाकात तय है। वे राइस के अलावा राष्ट्रपति बुश को एटमी करार पर भारतीय राजनीति के रंग की असलियत बताएंगे। बिचारे अमेरिकी समझ ही नहीं पा रहे कि भारत का इस मामले में असली रंग क्या है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में बयान दिया था कि इस मसले पर राजनीतिक दलों में व्यापक सहमति हासिल करने की कोशिश की जाएगी यानी सभी रंगों को मिलाकर एक रंग बनाया जाएगा। इस चक्कर में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भीष्म पितामह की संज्ञा देते हुए धरती माता के हित में आत्मा की आवाज सुनने की अपील भी की। लेकिन भगवा रंग की पार्टी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। गनीमत यह कि लाल रंगी वामदलों में जरूर गुलाबी रंग उभर रहा है जो नीले अमेरिका के साथ एटमी करार का उतना विरोध नहीं कर रहे जितना कि साम्राज्यवादी गुस्से से लाल प्रकाश करात कर रहे हैं। संकेत मिल रहे हैं हैदराबाद में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन से पहले पार्टी के बंगाल धड़े ने प्रकाश करात को एटमी करार पर अपना रंग लाल से गुलाबी कर लेने की सलाह दी है, ‘बदल ले भैया, बदल ले, समय रहते रंग बदल ले। बंगाल को भी कुछ तरक्की करने दे। संप्रग तो सब जानते हैं, है ही रंग-बिरंगी। वह आगे भी रंग-बिरंगी रहना चाहता है। इसलिए एटमी करार पर तिंरगा फैसला कर चुनाव में कूदने से बच रहा है। उसका संशय है कि अगर वह अल्पमत में आने का जोखिम उठा भी ले, तो कहीं भगवा रंग और लाल रंग जोर-शोर से एक जैसी जुबान तो नहीं बोलने लगेंगे, जैसा कि वे एटमी करार पर संसद में बोलते रहे हैं।

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