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पॉश इलाकों के पुराने घरों से दूर होते एग्जीक्यूटिव

राजधानी के अनेक पॉश इलाकों में किराए पर घर लेने से कतराने लगे है किराएदार। लाखों रुपये किराए देने वाले ये वीआईपी किराएदार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सीनियर एक्जीक्यूटिव से लेकर किसी देश के राजनयिक होते हैं। दरअसल पुराने हो गए घरों में रहने के लिए तैयार नहीं हैं किराएदार और इन पॉश कालोनियों में उन बड़े-बड़े घरों की कोई कमी नहीं है जिनमें सालों से मरम्मत नहीं हुई है। वसंत विहार,वेस्ट एंड, ग्रेटर कैलाश, शांति निकेतन मे ऐसे अनेक घर है, जिनमें एक अरसे से कोई मरम्मत नहीं हुई। रीयल एस्टेट मामलों के जानकार कहते हैं कि मोटा किराया देने वाले किराएदार पुराने बने घरों में कतई नहीं रहते। इन्हें तो चाहिए बिल्कुल नए बने घर। सनद रहे कि वसंत विहार, शांति निकेतन और वेस्ट एंड जैसे बेहतरीन इलाकों में प्लाट भारत सरकार के अफसरों को दिए गए थे। इन सभी ने शुरू में सामान्य से घरों में रहना शुरू किया। वक्त के बीतने के साथ ही ये तमाम इलाके दिल्ली के पॉश इलाकों की फेहरिस्त में शामिल हो गए। लैंड क्राफ्ट बिल्डर्स के सीईओ मनू गर्ग कहते हैं कि इन वेरी स्पेशल एरियास में रहने वाले सभी धनी नहीं हैं। इधर तो अब वे ही रह सकते हैं जिनकी किसी अन्य स्रोत से भी मोटी कमाई होती है। सिर्फ किराए की कमाई से यहां पर रहना नामुमकिन है। रीयल एस्टेट सलाहकार प्रमोद कपूर ने बताया कि उपयरुक्त इलाकों में एक फ्लोर का ही किराया प्रति माह डेढ़ लाख से दो लाख रुपये चल रहा है। जाहिर है कि इस राशि को वह ही दे सकता है जो मोटी कमाई कर रहा हो। जाहिर है कि जो घर पुराने बने हुए हैं, उनमें भारी-भरकम किराया देने वाले नहीं आते। इस बीच, इन और राजधानी के कुछ और पॉश इलाकों में पुराने घरों को लेकर वहां पर फ्लैट तथा फ्लोर बनाने वाले एक बिल्डर ने बताया कि पिछले कुछ सालों के भीतर उनके पास बहुत से मकान मालिक आते रहे जो उन्हें कहते हैं कि वे उनकी सम्पति पर फ्लैट बना दें। हमें इसमें कुछ भी बुराई नजर नहीं आती। उसने कहा कि इन पॉश इलाकों में अब पूरा घर खरीदना बहुत ही कम लोगों के बूते की बात रह गई है।

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  • Web Title: पॉश इलाकों के पुराने घरों से दूर होते एग्जीक्यूटिव