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होली पर फिर मूड में आए लालू

होली के दिन लालू एक बार फिर पूरे मूड में आ गए। उस दिन न तो डीए केस की चिंता थी और ना ही राज्यसभा चुनाव के गणित की। थी तो बस मस्ती और उल्लास। उन्होंने लोगों को रंगों से नहलाया, कंधे पर ढोल डाली और जोर से गाया- जोगीरा सरा-रा-रा..। प्रतिपक्ष की नेता राबड़ी देवी का आवास होली के दिन रंग में डूबा था। एक तरफ ढोल-ताशे बज रहे थे तो दूसरी तरफ बैंड बाजा वाले धुन बजा रहे थे-एक नींद सुते द बलमुआ..। लौंडा नाच पर तो राजद कार्यकर्ता झूम रहे थे।ड्ढr ड्ढr आवास का गेट पूरी तरह खोल दिया गया था। किसी के आने-जाने पर कोई रोक नहीं थी। कृत्रिम तालाब को रंगों से भर दिया गया था और कुछ लोगों को उसके अंदर ले जाकर पूरी तरह नहला दिया गया था तो कुछ लोग उस तालाब से बाल्टी में रंग निकाल-निकाल कर लोगों पर फेंक रहे थे।ड्ढr ड्ढr लालू प्रसाद लोगों से घिरे होली मनाने के बारे में लोगों को समझा रहे थे। साथ में खड़े थे राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक। होली में वादे के अनुसार श्री प्रसाद ने तो कुर्ताफाड़ होली नहीं खेली लेकिन इस कार्य को पूरा किया उनके पुत्र तेजप्रताप और उनकी युवा ब्रिगेड ने। राजद कार्यकर्ताआें और नेताआें के कुर्ते तो फाड़े ही गए मीडिया के लोगों को भी नहीं बख्शा गया। ऐसा कोई नहीं था जिसने श्री प्रसाद के करीब जाने की कोशिश की और उसका कुर्ता सही-सलामत बचा। रंगों की बरसात तो ऐसे हो रही थी कि कैमरों को कवर से ढंकना पड़ा। दिन के दस बजे से शुरू हुई रंगों की बरसात साढ़े ग्यारह बजे तक जारी रही। हालत यह थी कि श्री प्रसाद नहाने के लिए अपने कमरे के अंदर जाना चाहते थे लेकिन लोग थे कि उन्हें छोड़ ही नहीं रहे थे। इसके बाद श्री प्रसाद ने अपने कार्यकर्ताआें को इशारा किया और वे लोग बाल्टी में गोबर लेकर दौड़े। इसके बाद तो देखते-देखते उनके आवास का परिसर खाली हो गया।

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