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मध्य बिहार को सूखे से बचाने की कसरत

राज्य सरकार मध्य बिहार को सूखे से बचाने की कसरत में जुट गई है। सोन नदी में पानी न होने की वजह से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से पानी लेकर मध्य बिहार को आपूर्ति की जा रही है। सोन नदी में पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी एवं पूर्वी नहर प्रणाली में तातील व्यवस्था लागू कर पानी दी जा रही है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराज पर रिहन्द जलाशय से प्राप्त जल के अलावा बाणसागर जलाशय से प्राप्त जल को सोन नहर की सभी प्रणालियों में प्रवाहित किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत सप्ताह रिहन्द जलाशय से 2824 घनसेक जलस्रव बिहार को किया गया जबकि बाणसागर जलाशय से 300 घनसेक जलस्रव के साथ इन्द्रपुरी बराज पर कुल 6130 घनसेक जलस्रवित किया गया है। सोन नहर प्रणालियों में इसकी आपूर्ति की गई है। पश्चिमी लिंक नहर से 4130 घनसेक और पूर्वी लिंक नहर से 200 घनसेक पानी प्रवाहित किया गया। रिहन्द जलाशय की संयुक्त प्रचालन समिति की अनुशंसा के अनुरूप मार्च में रिहन्द से बिहार को 0.2 एमएएफ पानी का कोटा आवंटित है। इसके अनुसार बिहार को प्रत्येक दिन तीन हजार घनसेक पानी प्राप्त हो रहा है। इसी तरह बाणसागर जलाशय से बिहार की हिस्सेदारी 0.412 एमएएफ है। गत वर्ष सूबे के अधिसंख्य भाग में भारी बारिश के बावजूद मध्य बिहार में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, जिससे मध्य बिहार के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति बनी रही। हालांकि सरकार ने आपात काल में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से उस समय भी पानी ली, लेकिन उसका बहुत लाभ किसानों को नहीं हो सका। इसलिए इस वर्ष पहले से ही सूखे से निपटने की व्यवस्था की जा रही है।

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