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पानी में आग लगाने की तैयारी

अंर्तराष्ट्रीय निवेशकों ने पूंजी बाजार में तेल और सोने के बाद अब स्वच्छ पानी में आग लगाने की तैयारी कर ली है। निवेशकों का अनुमान है कि बढ़ती आबादी, उच्च होती जीवन शैली और बदलते खानपान, गर्म होती धरती के कारण स्वच्छ पानी की मांग में तेजी से इजाफा होगा आेर वर्तमान संसाधन इसके लिए पर्याप्त नहीं है। निवेशकों ने स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने वाले और इसकी आपूर्ति नियंत्रित करने वाले उपकरणों और संस्थानों में पूंजी लगाना शुरू कर दिया है। यह निवेश चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में अधिक हो रहा है जहां शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और पानी की आपूर्ति दिनोंदिन घट रही है।ड्ढr ड्ढr फोरविंडस कैपिटल मैनेजमेंट के किंबरले टारा ने बताया कि ताजा अध्ययनों के मुताबिक पिछले दस वर्षो में ऐसे शहरों का विस्तार तीन गुना हुआ है जबकि उनकी जरूरत की पूर्ति के लिए कुछ नहीं किया गया है। इन शहरों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि फोरविंडस ने इस वर्ष तीन अरब यूरो जुटाने के लिए ग्लोबल फंड लाने की योजना बनाई है। जर्मनी की सस्टस्ेंनेबल एसेट मैनेजमेंट के अनुसार विश्व के अधिकतर हिस्सों में स्वच्छ पानी की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है। संस्था ने स्वच्छ पानी के उद्योग के लिए 8.5 अरब स्विस फ्रंेक जुटा लिए हैं। संस्था ने दिसंबर में जारी एक रिपोर्ट में कहा था कि स्वच्छ पानी की कमी (शेष पेज 15 पर)ड्ढr वाले क्षेत्रों-दक्षिण स्पेन, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, पाकिस्तान, दक्षिण भारत, उत्तरी चीन हैं। मध्य-पश्चिमी अमेरिका, मैक्िसको और एंडीज के इलाके स्वच्छ पानी की कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा पूर्वी आस्ट्रेलिया में स्वच्छ पानी की स्थिति खराब है। चीन की स्थिति सबसे यादा खराब है।ड्ढr ड्ढr देश में विश्व की आबादी का पांचवां हिस्सा यहां रहता है जबकि स्वच्छ पानी केवल सात प्रतिशत है। वित्तीय संस्थान सिटी ग्रुप का कहना है कि चीन की पांच बड़ी नदियों का पानी मानवीय उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। इसलिए देश को वर्ष 2010 तक स्वच्छ जल संयंत्र बनाने होंगे जिसके लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। इसके बावजूद भी देश में सभी लोगों को लाभ नहीं होगा। यादातर निवेश शहरों और संपन्न इलाकों में हो रहा है और गांवों को अनदेखा किया जा रहा है। गैरिल लिंच के विश्लेषक राबर्ट मिलर बेकवेल का कहना है कि पानी निकालने और स्वच्छ करने के यंत्र और उपकरण विकासशील देशों के अधिकतर हिस्सों में नहीं है। इसलिए इन क्षेत्रों में भारी निवेश की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी मौजूद है।विश्व बैंक, मैं या तुम या कोई भी व्यक्ित समस्या जानता है लेकिन मुश्किल यह है कि इन क्षेत्रों में निवेशकों को कौन लाएगा।ड्ढr ड्ढr फोरविंडस कैपिटल मेनैजमेंट ने जलशोधन और आपूर्ति के क्षेत्र में निवेश करने का फैसला किया है। इसके अलावा कंपनी ने पाइप मीटर और अन्य संबंधित उपकरण निर्मित करने वाले संस्थानों में भी निवेश करने की योजना बनाई है। निवेशकों को इस स्वच्छ पानी का क्षेत्र अन्य क्षेत्रों के मुकाबले सुरक्षित लगता है क्योंकि अधिकतर देशों की सरकारें इस क्षेत्र के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराती हैं और उपभोक्ता भी इसके लिए राशि चुकाने के लिए तैयार है। श्री टारा कहते है कि सरकार को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना ही है इसलिए जो कंपनी पानी लाकर देगी सरकार उसके लिए रियायतें भी देंगी। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्ष से कंपनी स्वच्छ पानी के क्षेत्र में निवेश के लिए विभिन्न पहलू खोज रही है।ड्ढr ब्राजील के कच्चे तेल के लिए प्रसिद्ध मैकाए शहर में लोगों में स्वच्छ पानी के बड़े हौज बना लिए हैं और इसकी आपूर्ति का धंधा लोगों के लिए मुनाफ वाला साबित हो रहा है। बहरहाल शहर में छह डालर प्रति 100 लीटर की दर से पानी बेचा जा रहा है। यह पानी पेयजल नहीं है बल्कि स्वच्छ जल है जो मानवीय उपयोग में आता है।ड्ढr ड्ढr ब्रिटेन के इस्ट इंजीला विश्वविद्यालय के मुताबिक इस वर्ष गर्मियों में भारत में बरसात नहीं होना जलवायु परिवर्तन का सीधा नतीजा है। जिसके गंभीर परिणाम होंगे। जलवायु परिवर्तन का सबसे पहला खतरा सूखे के रूप में सामने आता है। विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक यूरोप में एक व्यक्ित अपने निजी जरूरतों के लिए प्रतिदिन 150 से 400 लीटर पानी का इस्तेमाल करता है। जबकि अमेरिका में यह मात्रा दोगुनी हो जाती है। चीन में प्रति व्यक्ित प्रतिदिन 0 लीटर पानी का इस्तेमाल करता है। अधिकतर विकासशील देशों में प्रति व्यक्ित के हिस्से में प्रतिदिन मात्र 50 लीटर पानी आता है।ं

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