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भूटान में ऐतिहासिक चुनाव सम्पन्न, मतगणना जारी

भारत के पड़ोसी देश भूटान में 100 साल की राजशाही के बाद लोकतंत्र की स्थापना के लिए सोमवार को मतदान सम्पन्न होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो गया। 47 सीटों के लिए कुल 3 लाख वोटरों ने चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भारत के पड़ोसी देश भूटान में 100 साल की राजशाही के बाद लोकतंत्र की स्थापना के लिए सोमवार को मतदान सम्पन्न होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो गया। 47 सीटों के लिए कुल 3 लाख वोटरों ने चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भारत के पड़ोसी देश भूटान में 100 साल की राजशाही के बाद लोकतंत्र की स्थापना के लिए सोमवार को मतदान सम्पन्न होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो गया। 47 सीटों के लिए कुल 3 लाख वोटरों ने चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।भारत के पड़ोसी देश भूटान में 100 साल की राजशाही के बाद लोकतंत्र की स्थापना के लिए सोमवार को मतदान सम्पन्न होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो गया। 47 सीटों के लिए कुल 3 लाख वोटरों ने चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।इन चुनावों के साथ ही भूटान में 100 साल पुरानी राजशाही का अंत हो जाएगा। भूटान के मुख्य चुनाव आयुक्त देशो कुंजगम वांदी ने राजधानी थिम्पू में कहा कि देश के सभी 20 जिलों में मतदान में भारी उत्साह दिखाई दिया है और यह एक ऐतिहासिक क्षण है। इस चुनाव में खड़े होने वाले सभी प्रत्याशी स्नातक हैं। भूटान में नेशनल असेंबली के 47 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान करने के योग्य पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 318,465 है। भूटान का पहला निर्वाचित प्रधानमंत्री नेशनल असेंबली के सदस्यों में से चुना जाएगा। मतदान के दिन सोमवार को भूटान में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। मतदान सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक चलेगा। भूटान के निर्वाचन आयोग के मुताबिक मतदान शुरू होने के दो घंटे के भीतर महज हजार लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो तीस प्रतिशत से कुछ ही यादा है। भूटान में संसदीय चुनाव आधुनिकीकरण और विकास की दिशा में उठा ताजा कदम है। भूटान की दो राजनीतिक पार्टियां कभी भी लोकतंत्र नहीं चाहती थीं, इसका विचार चौथे सम्राट जिग्मे सिग्ए वांग्चुक का था, जिन्होंने दो ही साल पहले गद्दी अपने पुत्र के लिए त्याग दी थी। ऑक्सफोर्ड से शिक्षा पाने वाले पांचवे सम्राट जिग्मे खेसर निम्गेयल वांग्चुक ने पिछले सप्ताह एक बयान जारी कर सभी मतदाताओं से वोट डालने को कहा था और भूटान की जनता शाही फरमान की अनदेखी नहीं करती। राजधानी थिम्पु में यादा लोग दिखाई नहीं दे रहे क्योंकि बहुत से दो दिन पहले ही मतदान करने के इरादे से अपने-अपने गांवों को लौट गए थे। इससे पूर्व सोमवार सुबह सुबह दक्षिणी सारपांग जिले में पुरूष और महिलायें अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर वोट देने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे। भिक्षुओं ने भूटान में लोकतंत्र की सफलता के लिए विशेष प्रार्थना की और घी के दिए जलाए। इन चुनावों में शाही परिवार और धार्मिक संस्थाओं के सदस्यों को वोट देने की अनुमति नहीं है। इन चुनावों के निरीक्षण के लिए भारत, यूरोपीय संघ, जापान, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राष्ट्र के करीब 42 पर्यवेक्षक आए हैं। भूटान नरेश जिग्मे सिग्मे वांग्चुक ने 2006 में अपने पुत्र जिग्मे केसर नामग्याल वांग्चुक को राजगद्दी सौंप दी थी। पूर्व भूटान नरेश ने देश को लोकतांत्रिक राष्ट्र में बदलने के लिए 2001 से ही प्रयास शुरू का दिए थे। नए संविधान के तहत भूटान नरेश राष्ट्र प्रमुख होंगे लेकिन नेशनल असेंबली को यह अधिकार है कि वह दो तिहाई बहुमत से राजा को हटा सकती है।

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