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रास चुनाव के लिए साबिर की राह आसान

आने वाले दिनों में लोजपा से एनडीए की दोस्ती की उम्मीद और निर्दलीय विधायक प्रदीप जोशी से खुन्नस ने राज्यसभा चुनाव में यूपीए समर्थित उम्मीदवार साबिर अली की राह आसान कर दी है। अपने तीन उम्मीदवारों की जीत की गारंटी के बाद भी एनडीए के पास 21 अतिरिक्त विधायक हैं। निर्दलीय के पक्ष में अगर ये वोट जाते तो लोजपा उम्मीदवार की परेशानी बढ़ सकती थी।ड्ढr ड्ढr लोजपा उम्मीदवार साबिर अली की चर्चित छवि को लेकर एनडीए में थोड़ी चिन्ता हुई। इसीके चलते भाजपा के एक धड़े में गोविन्द पांडेय के पक्ष में गोलबंदी की बात चली। लेकिन, इस पर सहमति नहीं बनी। वजह यह कि लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के दवाब में आकर ही एक रणनीति के तहत राजद से दोस्ती की। इससे लोकसभा चुनाव में एनडीए के प्रति पासवान के सद्भाव की उम्मीद खत्म नहीं हुई है। भविष्य को देखते हुए एनडीए ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा है जिससे राजद और लोजपा में नजदीकी बढ़े। इसके विपरीत प्रयास यह चल रहा है कि लोकसभा चुनाव तक लोजपा और एनडीए में घनिष्ठता कायम हो जाए। गोविन्द पांडेय के पक्ष में एनडीए के अतिरिक्त विधायकों की गोलबंदी न होने की दूसरी वजह निर्दलीय विधायक प्रदीप जोशी हैं। पांडेय को जोशी ने ही मैदान में उतारा है।ड्ढr ड्ढr बिक्रमगंज उप-चुनाव में जोशी ने अपनी पत्नी को उतार कर एनडीए के सामने मुश्किलें पैदा करने की कोशिश की थी। इसमें वे विफल रहे। एनडीए का आकलन रहा कि पांडेय की जीत का श्रेय जोशी को जाएगा। यानी लोकसभा और विधानसभा के अगले चुनाव में वे सभी सीटों पर बिक्रमगंज दोहराएंगे। जोशी जिस ‘वाद’ की सवारी करते हैं, भाजपा भी उसी की सह सवार है। एनडीए के ताजा रुख के बाद उम्मीद है कि पांडेय के पक्ष में गोलबंद निर्दलीय विधायकों का जोश भी थोड़ा ठंडा पड़ेगा।

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