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तीसरे मोर्चे पर संभल कर बढ़ेगा वाम

ांग्रेस व भाजपा के खिलाफ देश में तीसरा राजनैतिक विकल्प खड़ा करने के मामले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी संभल कर चलना चाहती है। पार्टी में यूएनपीए के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद हैं। कारण है कि तीसरे मोर्चे में शामिल दलों की आर्थिक, सामाजिक व विदेश नीतियों का अस्पष्ट होना। पार्टी की 20वीं कांग्रेस में नेतृत्व को देश भर से आए प्रतिनिधियों को आश्वस्त करना पड़ा कि तीसरे विकल्प से जुड़े दलों के साथ सहयोग के सवाल पर फूंक-फूंक कर ही कदम बढ़ाए जाएंगे।ड्ढr भाजपा विरोध : भाकपा में राजनैतिक प्रस्ताव में सांप्रदायिकता के खिलाफ अथक संघर्ष चलाने के साथ ही इस बात पर भी आम राय है कि राज्यों में अलग-अलग ढंग से सेकुलर दलों के साथ गठबंधन हो। भाजपा जहां ताकतवर है, उसे परास्त करने के लिए गैर भाजपा दल, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, चुनावी तालमेल की नीति अपनाएं। मंहगाई का पुरजोर विरोध : यह बात खुलकर सामने आई कि एटमी समझौते का विरोध जारी रखना सही कदम भले ही हो, लेकिन देश की आम जनता खास तौर पर मेहनतकश गरीब लोगों पर महंगाई की जो मार पड़ रही है, उससे जनता में वाम दलों की भूमिका के प्रति गलतफहमी है। बंगाल व केरल के कुछ वक्ताआें ने महंगाई व आर्थिक नीतियों के मुद्दे पर कांग्रेस व केन्द्र सरकार के खिलाफ खुलकर जहर उगला। भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी. राजा ने माना कि महंगाई से देश भर में व्याप्त जनअसंतोष खुलकर उभरा है। नेतृत्व को फटकार : विशाल हिंदी भाषी क्षेत्र में पार्टी की जर्जर स्थिति, लगातार सिकुड़ रही सदस्य संख्या और स्वतंत्र भूमिका में ढुलमुल रुख को लेकर बंगाल व केरल के कामरेडों ने पार्टी नेतृत्व से जवाब-तलब किया है। पूछा गया है कि 2004 में चंडीगढ़ पार्टी कांग्रेस में जो रोड मैप तैयार हुआ था, उसका क्या हुआ।

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