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इ-ऑक्शन में लाभ का रिकार्ड बनाया सीसीएल ने

सीसीएल ने चालू वित्तीय वर्ष 2007-08 में इ-ऑक्शन योजना में लाभ का नया रिकार्ड बनाया है। योजना के शुरू होने के बाद इस साल कंपनी को सर्वाधिक 266 करोड़ का लाभ हुआ है। हालांकि उत्पादों की बिक्री की मात्रा में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं हुई है।ड्ढr इस वर्ष कंपनी ने इ-बुकिंग और स्पॉट इ-ऑक्शन के माध्यम से 5.44 एमटी कोयला एवं उत्पाद की बिक्री की। उसने उपभोक्ताआें को 5.65 एमटी रॉ कोल बेचने का ऑफर किया था। मात्र 5.20 एमटी के लिए ही बीड हुई।ड्ढr वाशरी प्रोडक्ट में भी 1.0मिलियन टन ऑफर किया था। बीड हुई मात्र 0.24 एमटी की। इस बर्ष बाजार में सीसीएल के कोयले की अच्छी मांग थी। इसकी वजह से कंपनी को अतिरिक्त लाभ हुआ। रॉ कोल की बिक्री से कंपनी को करीब 25रोड़ एवं वाशरी प्रोडक्ट से सात करोड़ का लाभ हुआ।ड्ढr वर्ष 2006-07 में कंपनी ने 7.15 एमटी रॉ कोल एवं 1.08 एमटी वाशरी प्रोडक्ट की बिक्री का ऑफर किया था। इसके विरुद्ध 5.04 और 0.18 एमटी ही बिका। उस वर्ष कोर्ट के निर्देश के अनुपालन की वजह से एक माह ऑक्शन नहीं हो पाया था। लाभ मात्र 140 करोड़ होने के पीछे की वजह यह भी रही। इसी तरह वर्ष 2005-06 में 3.87 एमटी रॉ कोल और 0.77 एमटी वाशरी प्रोडक्ट का ऑफर किया गया था। इसके विरुद्ध 3.55 और 0.34 एमटी उत्पाद ही बिका। उस वर्ष कंपनी को 163 करोड़ का लाभ हुआ था।े वर्षलाभड्ढr 2007-08266ड्ढr 2006-07140ड्ढr 2005-06163ड्ढr नोट : राशि करोड़ में है जून तक वेतन समझौता करना चाहते हैं श्रमिक संगठन रांची (सं)। श्रमिक संगठन जून 2008 तक कामगारों का आठवां वेतन समझौता फाइनल करना चाहते हैं। सीटू के मिहिर चौधरी के मुताबिक नौ अप्रैल को कोलकाता में होनेवाली जेबीसीसीआइ की बैठक में प्रबंधन को इससे अवगत कराया जायेगा। समझौते की अवधि पांच वर्ष ही होगी। उन्होंने कहा कि इसमें देरी होने पर संगठन 25 फीसदी अंतरिम राहत की मांग करेंगे। इस पर सभी संगठन एकमत हैं। प्रबंधन का रुख कामगारों के पक्ष में नहीं होने पर संगठन के प्रतिनिधि बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। इसमें हड़ताल का निर्णय भी लिया जा सकता है। सनद रहे कि कामगारों का वेतन पुनरीक्षण का मामला जुलाई 2006 से लंबित है। इस बार प्रबंधन अंतरिम राहत की जगह एडहॉक राशि देने के पक्ष में है। बनारस में हुई जेबीसीसीआइ की बैठक में यह प्रस्ताव भी उसने दिया था। हालांकि श्रमिक संगठनों ने इसे खारिज कर दिया था। यही नहीं, वह डीपीइ के दिशा-निर्देश के आलोक में दस साल का वेतन समझौता ही करना चाहता है। काफी कामगार भी यही चाहते हैं। उन्होंने अपनी भावना से कोल इंडिया अध्यक्ष को अवगत भी करा दिया है। हालांकि लंबी अवधि के समझौते में घाटा होने की बात कह श्रमिक प्रतिनिधि इसे खारिज कर रहे हैं।ड्ढr पूरी कंपनी में आंदोलन फैलायेगा इनमोसाड्ढr रांची। इंडियन नेशनल माइन ऑफिसियल्स एंड सुपरवाइजरी स्टॉफ एसोसिएशन (इनमोसा) के सदस्य अपने आंदोलन को पूरी कंपनी में फैलायेंगे। संगठन सचिव एसके चौधरी के मुताबिक अभी पिपरवार और एनके में हड़ताल चल रही है। दूसरे दिन भी आेवरमैन और माइनिंग सरदार डय़ूटी पर नहीं गये। अध्यक्ष अजय पावसान एवं उप महामंत्री उमेश कुमार सिंह पिपरवार में कैंप किये हुए हैं। आंदोलन के समर्थन में सभी क्षेत्रों में सदस्यों की बैठक एवं प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि खान में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। प्रबंधन इसकी अवहेलना कर खदानें चला रहा है। आेवर रिपोर्टिग कर आंदोलन को विफल करने का प्रचार किया जा रहा है। राष्ट्रीय उप महासचिव आरपी सिंह ने कहा कि हड़ताल विफल करने की प्रबंधन की साजिश कामयाब नहीं हो पायेगी।ड्ढr घाटे के लिए पदाधिकारी को दोषी बतायाड्ढr रांची। भाकपा के सहायक सचिव केडी सिंह ने सीसीएल की खदानों में घाटे के लिए पदाधिकारियों को दोषी ठहराया है। उनके मुताबिक कई अफसर लॉबी बना कर खदानों को लूट एवं लुटवा रहे हैं। उन्हें मोटा वेतन भी मिल रहा है। घाटा कम उत्पादन होने मात्र से नहीं है। कोयले की तस्करी एवं चोरी से भी है। प्रतिदिन हजारों टन कोयले की कालाबाजारी और आेवर लोडिंग होती है। इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं होती है। ईमानदार अफसरों को तबाह किया जा रहा है। उन्होंने उद्योग और कामगारों के भविष्य के मद्देनजर इस पर रोक लगाने की मांग की है।ं

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