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सरकारी राजस्व का सशक्त माध्यम होता जा रहा सेवा कर

सेवा क्षेत्र के विस्तार की अपार संभावनाआें को देखते हुए सरकार ने सेवा कर के माध्यम से राजस्व का एक नया क्षेत्र ढूंढ़ लिया है। एक आेर सेवा उन्मुखी की अवधारणा प्रबल होती जा रही है। दूसरी आेर सरकार उस पर सेवा कर प्रत्यारोपित कर अपनी आय का प्रमुख स्रेत विकसित कर रही है। इस कर की शुरूआत जुलाई 1ो हुई। जब शेयर दलाली, टेलीफोन बिल और सामान्य बीमा प्रीमियम पर यह कर लगायी गयी थी। धीरे-धीरे कर योग्य सेवाआें में वृद्धि होती गयी। वर्ष 2005-06 में कर योग्य सेवाआें की संख्या 81 थी, जो वर्ष 2008 तक बढ़ कर हो गयी।ड्ढr वर्तमान में सेवा कर 12.36 फीसदी है। वर्ष 1े प्रारंभिक वषरे में सेवा कर से प्राप्त आय 410 करोड़ रुपये थी, जो बढ़ कर वर्ष 2007-08 में 36000 करोड़ रुपये हो गयी है। सेवा क्षेत्र में निजी क्षेत्रों के निरंतर बढ़ते रूझान के कारण सरकार भी सेवा कर को प्रमुख आय के रूप में विकसित कर रही है। वहीं सेवा कर की परिधि में आनेवाले करदाताआें की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।ड्ढr इधर सेवा कर के बढ़ते दायरे और राजस्व को देखते हुए विभिन्न राज्यों द्वारा यह मांग उठायी जा रही है कि सेवा कर का एक हिस्सा राज्यों को भी मिलना चाहिए। लेकिन स्पष्ट नीति के अभाव के कारण पिछड़े और अविकसित राज्यों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2010-11 तक इस मद में एक लाख 20 हजार करोड़ रुपये राजस्व में वृद्धि होने की संभावना है।ं

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