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तेलंगाना पर भाकपा में भारी खींचतान

भाकपा में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की स्थापना के मुद्दे पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पार्टी पिछले दो साल से घोषित तौर पर सेज नीति की मुखालफत कर रही है। लेकिन यहां चार दिन से चल रही पार्टी कांग्रेस में भाकपा इस मुद्दे पर गंभीर दुविधा के हालात से गुजर रही है। केरल व बंगाल के भाकपा कामरेड सेज मामले में दोनों राज्यों में माकपा की नीति पर चलने को विवश हैं, लेकिन बाकी प्रदेशों के ज्यादातर वक्ता इस पक्ष में हैं कि सेज के खिलाफ पार्टी की लाइन में लचीलापन लाने की बजाए मुखर विरोध की नीति को ही जारी रखा जाए। तेलंगाना का सकंट : तेलंगाना के कामरेडों का भाकपा नेतृत्व पर जबर्दस्त दबाव है कि उन्हें अलग प्रदेश की लोकप्रिय मांग पर चुप नहीं बैठना चाहिए। हालांकि पार्टी ने महसूस किया कि अलग प्रदेशों की मांग को हवा देने से सिर्फ बड़ी पार्टियों को ही राजनीतिक लाभ होता है। चंद्रबाबू से मिले शीर्ष भाकपा नेता : भाकपा महासचिव ए. बी. बर्धन के साथ वरिष्ठ पार्टी नेता बुधवार सुबह यहां बंजारा हिल्स स्थित टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू से नाश्ते पर मिले। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नायडू ने प्रदेश की राजनैतिक स्थिति पर भाकपा नेताआें को अपने रुख से अवगत कराया। नायडू तीसरा विकल्प तैयार करने में माकपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। माकपा पर भी बरसे प्रतिनिधि : कई वक्ताआें ने महाधिवेशन में राजनैतिक प्रस्ताव पर भी संशोधन पेश करते हुए कहा कि लोकसभा में स्पीकर का पद पाने के बाद माकपा यूपीए सरकार की हर जनविरोधी नीति में शामिल हो गई है। हालांकि कुछ सदस्यों की यह भी राय थी कि वाम एकता को मजबूत करने के लिए भाकपा व माकपा दोनों को संयुक्त आंदोलन चलानें चाहिए।

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