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वेतन में असमानता से नाराजगी

छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को दी गई अधिक वेतन बढ़ोतरी को लेकर श्रम संगठन नाराज हैं। इस मुद्दे पर वह विरोध जताने की तैयारी है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस विसंगति को ठीक करेगी। पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों में भी छोटे कर्मचारियों के वेतन में इसी तरह का अंतर था, लेकिन सरकार को उसमें सुधार के लिए मजबूर होना पड़ा था। सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के अध्यक्ष एम.के. पांधे ने हिन्दुस्तान के साथ एक बातचीत में यह बातें कहीं। उन्होंने दावा किया कि ग्रुप डी के कर्मचारी के वेतन में जो बढ़ोतरी हुई है वह बहुत कम है। उसके लिए जिस 6,660 रुपये के वेतन की बात है वास्तव में उसे इससे कम वेतन मिलेगा। इसके साथ ही ग्रुप डी को समाप्त करने की सिफारिश का भी श्रम संगठन विरोध करेंगे। उनका कहना है कि अभी इस वर्ग में करीब 15 लाख कर्मचारी हैं। उनकी जगह आयोग ने ठेके पर काम कराने की जो सिफारिश दी है वह गलत है। पांधे कहते हैं कि पहले वेतन आयोग के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि न्यूनतम वेतन पाने वाले कर्मचारी और अधिकतम वेतन पाने वाले कर्मचारी के वेतन के बीच आठ गुना से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। लेकिन छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में यह अंतर 12 गुना का है जो जायज नहीं है।

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