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सेना में गया,शहीद हुआ पर सर्टिफिकेट फर्जी थे

सेना में नौकरी के लिए एक युवक ने फर्जी प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। उसे नौकरी मिली, लेकिन कारगिल में उसकी मौत हो गई। सेना ने उसे शहीद का दर्जा दिया और लाखों की सहायता राशि भी प्रदान की। मामला बल्दीराय ब्लॉक के हलियापुर गाँव का है। यहाँ के नागेन्द्र प्रताप सिंह के बड़े बेटे मुकेश को राजेन्द्र सिंह बनाकर ए-17 महार रेजीमेंट में तैनाती दिला दी। सिपाही नं. 4576े रूप में तीन वषरे तक नौकरी करते हुए करगिल के बटालिक सेक्टर में तैनाती के दौरान बादल फटने से उसकी मौत हो गई। मरणोपरान्त परिवारीजनों को प्रशस्तिपत्र, मेडल और लाखों की धनराशि भी दी गई।ड्ढr पता चला है कि नागेन्द्र सिंह के सिर्फ दो बेटे हैं मुकेश व नितिन सिंह। नागेन्द्र सिंह सेना से ही सेवानिवृत्त हुए हैं। नागेन्द्र के सबसे छोटे भाई राजेन्द्र के अंकपत्रों में हेराफेरी कर मुकेश को सेना में भर्ती कराया गया। पाँच अगस्त 2006 को सूचना आई कि करगिल के बटालिक सेक्टर में राजेन्द्र सिंह पुत्र नागेन्द्र की बादल फटने से मौत हो गई तभी गाँव लोगों को शक हुआ। उनका कहना है कि राजेन्द्र तो जीवित है और नागेन्द्र का छोटा भाई है। 17 दिसम्बर 2007 को जन सूचना अधिनियम के तहत प्राथमिक पाठशाला हलियापुर के प्रधानाध्यापक ने सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी बल्दीराय को भेजी रिपोर्ट में लिखा कि विद्यालय के अभिलेखानुसार मुकेश सिंह पुत्र नागेन्द्र सिंह ने वर्ष 1में कक्षा एक में प्रवेश लिया और 1तक कक्षा पाँच की शिक्षा ग्रहण की। प्रवेश पंजिका के क्रमांक 2116 पर अंकित इनकी जन्मतिथि 26 जनवरी 1है।ड्ढr इस मामले में विद्यालय के दस्तावेजों के अनुसार राजेन्द्र प्रताप सिंह पुत्र देव प्रताप सिंह ने तीन जुलाई 1ो कक्षा एक में प्रवेश लेकर 23 अप्रैल 1ो कक्षा पाँच पास किया। राजेन्द्र सिंह पुत्र नागेन्द्र प्रताप सिंह निवासी हलियापुर नाम के छात्र ने प्राथमिक विद्यालय हलियापुर के अभिलेखानुसार विद्यालय से शिक्षा नहीं ली है। जिविनि द्वारा दी गई जानकारी में मुकेश ने कक्षा नौ उत्तीर्ण की थी, हाईस्कूल की परीक्षा उसने कभी पास नहीं की। परिवार रजिस्टर में उसकी जन्मतिथि 5-6-1दर्ज हैं

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