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जलाशयों का निर्माण व तटबंधों की लंबाई बढ़ाना जरूरी

राज्य में बाढ़ एक स्थायी समस्या बन गयी है। इसके निदान के लिए सरकार को कारगर कदम उठाने की जरूरत है। इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) बिहार स्टेट सेंटर के अध्यक्ष अरुण कुमार सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी निदान जलाशयों का निर्माण व तटबंधों की लंबाई बढ़ाए बिना संभव नहीं है। गंगा एक्शन प्लान, जल संसाधन विभाग व आपदा प्रबंधन विभाग को साथ मिलकर काम करना होगा तभी इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।ड्ढr ड्ढr संस्थान का मानना है कि इस समस्या के निदान के लिए इंजीनियरिंग पर विशेष जोर देना होगा लेकिन आज तक जो भी इंजीनियरिंग निदान जो भी बने हैं उन्हें पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर में बाढ़ का पानी लगातार जमा रह जाता है और इसका कारण व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम का अभाव होना है। उन्होंने कहा कि अभी से ही राज्य मंे बाढ़ से बचाव का उपाय खोजना शुरू कर देना होगा, तभी इस पर खर्च होनेवाली राशि पर काबू किया जा सकेगा। 2007 में बाढ़ राहत सामग्री के वितरण पर लगभग 1300 रुपये खर्च किए गए और सबसे अधिक हेलीकाप्टरों पर खर्च हुए। इस खर्च को कम करने के लिए राहत सामग्री के भंडारण व वितरण की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है। साथ ही बाढ़ के समय हाय-तौबा मचाने के बजाए अभी से कार्यक्रम का निर्माण जरूरी है। संवाददाता सम्मेलन में इं. अतुल कुमार वर्मा, इं. शैलेंद्र कुमार सिन्हा, इ. वीएस वर्मा व इं. एमजी कौलेश्वर मौजूद थे।

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  • Web Title: जलाशयों का निर्माण व तटबंधों की लंबाई बढ़ाना जरूरी