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गिलानी ने दिखाया वरिष्ठ मंत्रियों पर भरोसा

पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने आर्थिक क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखने वाले तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग के मुद्दे पर अमेरिकी तेवरों से सहजता से निपटने में सक्षम वरिष्ठ मंत्रियों को अपने भावी मंत्रिमण्डल में जगह दी है। पाकिस्तान की नई सरकार के करीबी सूत्रों ने यह दावा किया है। पाकिस्तान में सत्तारूढ़ गठबंधन के मुख्य घटक दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की प्रवक्ता शेरी रहमान के मुताबिक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी शनिवार को राष्ट्रीय असेम्बली में विश्वास मत हासिल करने के बाद अपने 22 सदस्यीय मंत्रिमण्डल की घोषणा करेंगे। गिलानी गत 27 दिसम्बर को हुए कार बम हमले में मारी गई पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के वरिष्ठ सदस्य हैं और वह एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अलावा दो अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पीपीपी के निर्वाचित सदस्यों को रक्षा आंतरिक सुरक्षा तथा विदेश मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अलावा स्वास्थ्य तथा महिलाआें से जुड़े अहम महकमों की बागडोर सौंपी जाएगी जबकि नवाज शरीफ की पीएमएल-एन को वित्त, ऊर्जा, पेट्रोलियम तथा जल से सम्बन्धित विभागों का जिम्मा दिया जाएगा। पीपीपी की प्रवक्ता ने कहा कि शुरुआत में सरकार के मंत्रिमण्डल में 22 सदस्यों को शामिल किया जाएगा और बाद में इसका विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि पाक में सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों पीपीपी तथा पीएमएल ने हाल में हुए आम चुनाव में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की समर्थक सत्तासीन पार्टी को हराया था। उसके बाद यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि मुशर्रफ को जल्द ही अपना पद छोड़ना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार नवाज शरीफ तो पहले ही कह चुके हैं कि मुशर्रफ को जल्द ही अपनी गद्दी छोड़ देनी चाहिए। सरकार के करीबी सूत्रों के मुताबिक सत्तारूढ़ गठबंधन पाकिस्तान में परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर बेहद गम्भीर है क्योंकि अलकायदा के आतंकवादी सुरक्षा बलों तथा राजनेताआें पर फिदाईन हमलों की झड़ी लगाकर देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार देश में परमाणु कमांड तथा नियंत्रण प्रणाली में बदलाव नहीं करेगी। सूत्रों के मुताबिक ऐसा करने की कोई वजह नहीं है। पीपीपी देश में स्थिरता लाने तथा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाने की इच्छुक है और मुशर्रफ के भविष्य तथा आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के साथ सहयोग के मामले में भी वह यही रवैय्या अपनाना चाहती है।

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