अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

यह पारी पिता को समर्पित

ाश मेरे पिता आज इस दुनिया में होते। मैं अपने इस शतक को अपने पिता को समर्पित करता हूं। साथ ही मैं धन्यवाद देता ही अपनी पत्नी आरती का, जो मेरे हर दुखदर्द में मेरा साथ देती है। आज भी वह मेरे साथ है। मेरा बेटा भी चेन्नई में है। यह कहना है विरेन्दर सहवाग का, जिन्होंने आज अपने टेस्ट करियर में दूसरा तिहरा शतक जमा खुद को ब्रैडमैन और लारा के बराबर ला खड़ा किया है। लगभग छह महीने पहले सहवाग के पिता का देहांत हो गया था। मुल्तान में जब आपने 30रन बनाए थे तब आपको मुल्तान का सुल्तान कहा गया था, अब यहां तिहरा शतक बनाने पर आपको चेन्नई का चैंपियन कहा जा रहा है, आपको कैसा लग रहा है। सहवाग कहते हैं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई मुझे मुल्तान का सुल्तान कहे या फिर चेन्नई का चैंपियन। मेरा काम है रन बनाना और मुझे नए-नए नाम देना काम है मीडिया का।उमसभरी गर्मी में इतने लम्बे समय तक विकेट पर रहने से क्या कोई परेशानी नहीं हुई, पूछने पर कहते हैं, चेन्नई में खेलना हमेशा मुश्किल होता है। मैं फिजियो (पॉल क्लोज) और पैडी अपटॉन का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। वे हर ब्रेक में नमक और नारियल का पानी लाते रहे। इसके साथ ही मैं धन्यवाद देना चाहता हूं पीयूष चावला और युवराज सिंह का जिन्होंने हर ब्रेक में मेरी काफी मदद की। लंच के समय मुझे आइस-बाथ भी लेना पड़ा था। मुल्तान और यहां की पारी की तुलना आप कैसे करेंगे, पूछने पर सहवाग ने कहा, यह मुल्तान से बेहतर है। यहां की परिस्थितियों को देखते हुए मैं इसे अपने बेस्ट पारी मानता हूं। मुल्तान में कंडीशन यहां से अच्छी थी। इतना ज्यादा गर्मी भी वहां नहीं थी। बल्लेबाजी में आपकी आक्रामकता अभी भी बरकरार है। पूछने पर कहते हैं, मैं ऐसे ही खेलते हुए बड़ा हुआ हूं। 2े बाद छक्का मारा और इसके बाद भी छक्का मारने की कोशिश की थी। मेरी खेलने का अंदाज ही कुछ ऐसा है और मैं इसे बदल नहीं सकता। रिकॉर्ड की बजाय मैं सिर्फ अपनी टीम के लिए खेल रहा था। टेस्ट में 100 की स्ट्राइक रेट से रन बनें तो वह पारी तो अपने आप में बेस्ट ही होगी। सहवाग ने 278 गेंदों में अपना तिहरा शतक पूरा किया था। अब आपको क्या लगता है कि इस मैच कोई परिणाम आने की संभावना है। हमारे जीतने की अच्छी संभावना है। अगर हम 700 रन तक बना सके तो अंतिम दिन हरभजन और कुम्बले हमें मैच जिता सकते हैं। आप आक्रामक थे जबकि द्रविड़ बहुत धीमी खेल रहे थे। उन्होंने कहा, यह द्रविड़ का स्टाइल है। हम दोनों में अच्छी अंडरस्टेंडिंग थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: यह पारी पिता को समर्पित