DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिन घुँघरू थिरके बिरजू महाराज

राष्ट्रीय कथक संस्थान के रवीन्द्रालय में आयोजित दो दिवसीय ‘रसरंग’ में पहले दिन नृत्य नाटिकाओं का ही कार्यक्रम था लेकिन अपनी ‘कलाश्रम’ संस्था के साथ आए पं. बिरजू महाराज दर्शकों का अनुरोध टाल न सके और मंच पर बिना घुँघरू के ही नाचने उतर गए। बिरजू महाराज ने नृत्य में जो रचनाएँ प्रस्तुत कीं, मसलन -गिनती की तिहाई, दो दोस्तों की कथा, मयूर गत, गौरया माँ और बच्चे, उन्हें उन्होंने लखनऊ में कई बार प्रस्तुत किया है लेकिन वे उनके इस कथन को सार्थक कर रही थीं कि टुकड़े, परन तो वही होते हैं लेकिन कलाकार उनमें नए रंग भर देता है। भाव प्रदर्शन, बोलों का सुन्दर निकास, अद्वितीय लयकारी से उन्होंने दर्शकों को इस बार भी मुग्ध कर लिया।ड्ढr लेकिन उनके नृत्य संयोजन में प्रस्तुत ‘गीत गोविन्द’ उनके दूसरी नृत्य नाटिकाओं से कहीं-कहीं कमजोर दिखी। जयदेव के ‘गीत-गोविन्द’ पर आधारित इस नाटिका की परिकल्पना एवं नृत्य निर्देशन शाश्वती सेन का था और वे ही इसमें राधा की प्रमुख भूमिका में थी। नाटिका में राधा-कृष्ण के शाश्वत एवं उदात्त प्रेम को दर्शाया गया था। नाटिका में सुचरिता दत्ता, ममता महाराज, महुआ शंकर, पल्लवी डे, जूतीमल नालालिया, अर्पिता, पायल, माला, राघव शाह, संजीव परिहस्त, सुब्रतो प्रमुख भूमिकाओं में थे। इसके पूर्व उत्सव की आयोजक संस्था की ओर से ‘सप्तरंग’ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति हुई। प्रकृति से जोड़ते इस नाटिका में इन्द्रधनुष के सातों रंग की व्याख्या की गई थी। नाटिका में अर्चना तिवारी, विकास पाण्डेय, सुपर्णा मिश्र, अंशू श्रीवास्तव, आकृति भारद्वाज, स्मृति भण्डारी, आयुषी वर्मा, देवांशी तिवारी, नीतू सिंह, आयुषी शुक्ल, काव्या राज्यपाल, विदुषी रस्तोगी ने भाग लिया। संस्कृति मंत्री नकुल दुबे ने समारोह का उद्घाटन किया। संस्थान की सचिव सरिता श्रीवास्तव ने स्वागत किया।ड्ढr फिल्में देखनी छोड़ दीड्ढr कुछ वर्षो पूर्व संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ में नृत्य निर्देशन करने और ठुमरी गाने वाले प्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू महाराज फिल्मों के संगीत से नाराज हैं और उन्होंने फिल्में देखनी छोड़ दी हैं। उन्होंने कहा कि टेलीविजन चैनलों पर और फिल्मों में जिस तरह के गीत आ रहे हैं, मैं कानों में उंगली डाल लेता हूँ। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि हालाँकि यह भी संगीत है लेकिन कुंभकरण का संगीत होगा। बिरजू महाराज ने कहा कि भारतीय संगीत तो आत्मा को सुकून देने वाला होता है। उन्होंने एक बार फिर कहा कि लखनऊ आने के लिए लालायित रहता हूँ क्योंकि दिल यहीं बसता है। कहीं भी जाता हूँ लखनऊ वाला ही रहता हूँ।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बिन घुँघरू थिरके बिरजू महाराज