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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हो रहा उल्लंघन

सभी आदिम जनजाति परिवारों, एकल महिलाओं, विधवाओं और विकलांगों को अंत्योदय अन्न योजना से जोड़ने के सवर्ोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के आलोक में शुक्रवार को ग्राम स्वराज अभियान द्वारा जन-सुनवाई की गयी, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से आये लोगों ने अपनी बात रखी। इसमें यह बात उभर कर आयी कि अंत्योदय कार्ड के लिए हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं। एसडीएम स्तर तक के अधिकारी तक को सवर्ोच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं। जिन्हें कार्ड मिले हैं, उन्होंने अनियमित आपूर्ति, अधिक पैसे लेने और माप-तौल में गड़बड़ी की शिकायत की।ड्ढr छतरपुर अनुमंडल, गढ़वा जिले के सामाजिक कार्यकर्ता विरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने लोगों के लगभग छह सौ आवेदन पत्र जमा कराये हैं, पर एसडीएम रविंद्र कुमार सिंह का कहना है कि सरकार के पास ऐसा कोई आदेश नहीं है। खूंटी के बलबीर मुंडा ने कहा कि कारगे, रबंगदाग और जनोमडीह के राशन दुकानदार माप-तौल के लिए बटखरे की जगह पत्थरों का प्रयोग करते हैं। ललित कुमार ने बताया कि लातेहार, पलामू और गढ़वा जिले में 1आवेदन लंबित हैं। टीसीडीआर के परियोजना निदेशक एके स्वाइन ने कहा कि रांची, सिल्ली और अनगड़ा प्रखंड के कुछ गांव में किये गये सैंपल सर्वे में यह पता चला कि आदिम जनजाति, विकलांग, विधवा और सिर पर मैला ढोनेवाले कई व्यक्ितयों को अंत्योदय कार्ड नहीं मिला है। गोड्डा जिले से आये पहाड़िया जनजाति के सुजीत कुमार माल्तो ने बताया कि उनके प्रखंड में आदिम जनजाति के 80 फीसदी लोगों को कार्ड मिल चुके हैं, पर उन्हें 35 किग्रा के स्थान पर 25-30 किग्रा अनाज ही मिलता है। दुकानदार पूरे 35 किग्रा की कीमत वसूलता है।ड्ढr सामाजिक कार्यकर्ता बलराम और अर्थशास्त्री रमेश शरण ने लोगों की बातें सुनी और सभी की शिकायतों को सवर्ोच्च न्यायालय में भेजने और झारखंड उच्च न्यायालय में एक पीआइएल दाखिल करने की बात कही। जनसुनवाई में 12 सूत्री मांगपत्र भी तैयार किया गया। मौके पर गोपीनाथ घोष, रामदेव विश्वबंधु, अशर्फी नंद प्रसाद सहित कई लोगों ने विचार रखे।

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