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यूपीए-एनडीए अपनी गिरेबां में झांकें : राय

भाजपा के बागी विधायक रवींद्र कुमार राय ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में दूसरे पर आरोप लगानेवाले यूपीए और एनडीए के नेता पहले अपनी गिरेबां में झांकें। झारखंड की जनता जानती है कि अजरुन मुंडा और शिबू सोरेन के बीच कितने अंतरंग संबंध हैं। इन्हीं लोगों ने चुनाव को संदिग्ध बना दिया। यूपीए ने जानबूझ कर अंतिम समय तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की। शिबू सोरेन बता सकते हैं कि झारखंड के लिए किशोर लाल की प्रासंगिकता क्या थी? सच्चाई यह है कि तथाकथित पुराने समाजवादियों की चौकड़ी ने उन्हें उम्मीदवार बनवाया। अंतिम समय तक यह कोशिश भी की गयी कि कांग्रेस और राजद चुनाव का बहिष्कार करंे और किशोर की गोटी लाल हो। योजनाबद्ध तरीके से विधायकों के खिलाफ अभियान चलाया गया। राय शुक्रवार को अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।ड्ढr उन्होंने सवाल उठाया कि परिमल नाथवाणी के विरोध का जो आधार बनाया गया, वह लाल और आनंद पर लागू क्यों नहीं हुआ। इनके आवासों के समक्ष प्रदर्शन क्यों नहीं हुए। राय ने कहा कि बागियों ने अंतिम समय में अपना पत्ता इसलिए खोला कि उन्हें यूपीए के प्रत्याशियों को हराना था। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता के तहत प्रथम वरीयता का मत जेपीएन सिंह और संवैधानिक प्रावधान के तहत द्वितीय वरीयता का वोट नाथवाणी को दिया। बागी विधायक चाहते तो नाथवाणी को प्रथम वरीयता का मत दे सकते थे। कुछ नहीं होता। राज्यसभा में अब तक दर्जनों उद्योगपति गये हैं। पर राजनीतिक प्रतिबद्धता और रणनीति को ध्यान में रख कर उन लोगों ने सही फैसला किया। दुखद स्थिति तो भाजपा की रही, जिसे पहली बार राज्यसभा चुनाव में प्रदेश के नेताओं और विधायकों पर भरोसा नहीं रहने के कारण केंद्रीय पर्यवेक्षक को भेजना पड़ा और दिखाकर मत डालने के लिए विवश होना पड़ा।

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