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धांधली होती रही तमाशबीन बना रहा राज्य निर्वाचन आयोग

धांधली होती रही और राज्य निर्वाचन आयोग तमाशबीन बना रहा। नगर निगम चुनाव में मतदान से लेकर मतगणना तक व्यवस्था को लेकर हर जुबान से सवाल उठ रहे हैं। यह आम स्वर है कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव का दावा करने वाला आयोग इसमें विफल साबित हुआ। भले ही 57 प्रत्याशियों के सिर पर जीत का सेहरा बंध जायेगा, लेकिन ऐसे चुनाव को राजधानी की जनता वर्षो याद रखेगी। लोकतंत्र में वोट का सर्वाधिक महत्व है। यही वो तरीका है, जिसके जरिये जनता अपने प्रतिनिधि चुन कर भेजती है। नगर निगम चुनाव में जनता को सही ढंग से प्रतिनिधि चुनने का मौका नहीं मिल पाया। चुनाव के दिन लाठी बल एवं बाहुबल का जोर रहा, तो मतगणना के वक्त पैरवी का। बड़े-बड़े नेता अधिकारियों को किसी प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का निर्देश दे रहे थे। मतगणना कार्य एवं वहां व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों के मोबाइल फोन के प्रिंट आउट निकाल लिये जायें, तो इस आरोप की स्वत: पुष्टि हो जायेगी। आखिर किस मकसद से नेताओं के फोन बार-बार उनके मोबाइल पर आ रहे थे। इतना सब कुछ जानने के बाद भी राज्य निर्वाचन आयोग चुप्पी साधे रहा। आम जनता एवं निर्बल प्रत्याशी मुंह ताकते रह गये।ं

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