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राज्य की खुशहाली की मांगी दुआ

हजरत रिसालदार बाबा के सालाना उर्स के दूसरे दिन से ही जायरिनों की भीड़ बढ़ने लगी है। शहरी क्षेत्र के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों के लोग बाबा के मजार पर आ रहे हैं। यहां जायरिनों और श्रालुआें की सुविधा का यहां विशेष ख्याल रखा जा रहा है। दरगाह ट्रस्ट के अध्यक्ष सरफराज अहमद अपने सहयोगियों के साथ सुबह से देर रात तक यहां मुस्तैद रहते हैं।ड्ढr उर्स के दूसरे दिन जुमा होने के कारण मजार शरीफ की रौनक सुबह से बढ़ गयी थी। अन्य दिनों की अपेक्षा यहां जुमे की नमाज पढ़ने वालों की संख्या अधिक थी। मजारवाली मसजिद के अलावा मजार परिसर में भी नमाज अदा की गयी। जुमे की नमाज में राज्य की खुशहाली और उन्नति के लिए विशेष दुआ की गयी। शांति और भाईचारा बनाये रखने, सभी धर्म और समुदाय के मिलजुल कर रहने की कामना की गयी। नमाज पढ़ने के बाद लोगों ने यहां मजार पर जियारत भी की।ड्ढr जुमे की नमाज से लेकर देर शाम तक यहां लंगरखानी भी चलता रहा। गरीब, अमीर, बच्चे, बड़े, बुढ़े और नौजवान इसमें शरीक होते रहे। लंगरखानी की व्यवस्था मजार शरीफ के अंदर ही की गयी थी। इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों के अलावा दूसरे श्रालु भी हाथ बंटा रहे थे। बाद नमाज ईशा उर्स मुबारक के मुकद्दस मौके पर केरत-ए-कुरआन का इनामी मुकाबले का आयोजन किया गया। मदरसा फैजाने मुस्तफा थड़पखना, इसलामी मरकज हिंदपीढ़ी, मदरसा गरीब नवाज डोरंडा, गुलशने बगदाद हजारीबाग, मदरसा गौशिया मनीटोला के अलावा रांची शहर और ग्रामीण इलाके के मदरसों के हाफिजों ने इसमें हिस्सा लिया। सबसे कम उम्र 12 वर्ष के सईद हाशमी ने भी इसमें हिस्सा लिया। वह खानकाह असदकिया मदरसा मनीटोला का विद्यार्थी है। हर साल आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का विशेष महत्व होता है। दरगाह ट्रस्ट के पदाधिकारी विशेष रूप से ध्यान देते हैं।

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