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अरसे बाद चला एक माह का बजट सत्र, 20 बैठकें हुईं

झारखंड विधानसभा की बीस बैठकों और एक महीने का लंबा बजट सत्र 27 मार्च को निबट गया। सत्र 27 फरवरी को शुरू हुआ था। कई साल बाद विधानसभा का बजट सत्र इतना लंबा चला। काम-काज के मामले में यह सत्र भले ही बहुत महत्वपूर्ण न रहा हो, लेकिन बैठकों के मामले में इसे जरूर याद किया जायेगा। यूपीए की कोड़ा सरकार लंबा सत्र चलाने के लिए अपनी पीठ जरूर थपथपा सकती है।ड्ढr सरकार को दूसरी बार बजट पेश करने का अवसर मिला। बजट सत्र को दो और मामलों के लिए याद किया जायेगा। स्पीकर को हटाने के लिए विपक्ष ने दूसरी बार नोटिस दिया। स्पीकर के नियमन पर भी उंगलियां उठीं। सरकार ने माननीयों का वेतन-भत्ता विधेयक वापस लेकर फिर से उसे पेश किया और दुबारा पास कराया।ड्ढr विधानसभा की बैठकों को लेकर सदैव यह चिंता जतायी जाती रही है कि सत्र सिकुड़ते जा रहे हैं। सरकार लंबा सत्र चलाना नहीं चाहती है। जनता की समस्याएं सामने नहीं आ पाती हैं। हल्ला-हंगामा के कारण विधायी कामकाज नहीं हो पाते हैं।ड्ढr पिछले कई सालों से यही होता रहा है। पिछले बजट सत्र के दौरान पलामू लोकसभा का उपचुनाव था। पक्ष-विपक्ष की मौन सहमति से सत्र की अवधि कम करनी पड़ी। महज एक दिन की बहस पर वर्ष 2007-08 का बजट पास करा लिया गया था। सत्ता पक्ष और विपक्ष का ध्यान बजट सत्र से कहीं ज्यादा उपचुनाव पर लगा था। फिर मानसून सत्र के दौरान जमशेदपुर लोकसभा उप चुनाव आ गया। सत्र के कामकाज पर इसका असर पड़ा। बजट सत्र में इस बार विपक्ष ने जम कर बवाल काटा। हंगामा किया और कई दिन तो सदन की कार्यवाही तक नहीं चलने दी। इसी हंगामे के बीच बजट भी पास करा लिया गया।

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