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उत्तर भारतीयों पर फिर हमला

मुंबई में एक बार फिर उत्तर भारतीय टैक्सी वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के हमले के शिकार हुए हैं। मनसे के कार्यकर्ताओं ने छह टैक्सी ड्राइवरों को पीटा और उनकी टैक्िसयों को नुकसान पहुंचाया है। पुलिस ने इस सिलसिले में मनसे के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। मनसे के प्रवक्ता शिरीष पारकर ने अपने कार्यकर्ताओं का बचाव करते हुए कहा कि टैक्सी ड्राइवरों ने उनके कार्यकर्ताओं को अपशब्द कहे जिसके परिणाम में यह हादसे हुए हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में कुल छह टैक्सी वाले मनसे के शिकार हुए हैं।ड्ढr ड्ढr वरली में गैलेक्सो कंपनी के पासतीन टैक्सी वालों को पीटा गया जबकि लोअर परेल के नजदीक दो टैक्सी वाले और कालाचौकी में एक टैक्सी वाले की पिटाई की गई है और उनकी टैक्िसयों को नुकसान पहुंचाया गया है। टैक्सी ड्राइवरों के मुताबिक कुछ युवा मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और पूछा कि क्या तुम भैया (उत्तर भारतीय) हो? ये युवक उत्तर भारतीय जानकर पिटाई करने लगे और टैक्सी को तोड़ डाले। अमित कुमार यादव नामक टैक्सी वाले का कहना है कि उन्होंने कुछ नहीं किया और हमलावरों ने पत्थरों से उनकी टैक्सी को नुकसान पहुंचाया। अमित का कहना है कि वह अब इस शहर में सुरक्षित नहीं है जबकि वह इसी शहर में पला-बढ़ा है। पुलिस ने दो मोटरसाइकिल के साथ आशीष उत्तम परब, प्रवीण पावसकर, निलेश शेलार और समीर मोरे गिरफ्तार किया है।ड्ढr ड्ढr वरली पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर रोहित खोत का कहना है कि आरोपियों ने टैक्सी वाले से रास्ते के बारे में पूछा और टैक्सी वालों ने भोजपुरी में जवाब दिया तो आरोपियों ने उन पर हमला किया और उनकी टैक्सी को नुकसान पहुंचाया। इधर डीसीपी सुनील रामानंद ने बताया कि गिरफ्तार किए गए युवकों ने ही टैक्सी ड्राइवरों के साथ मारपीट की और उनकी टैक्सी तोड़ी है। उधर कांग्रेस के प्रवक्ता संजय निरूपम ने मांग की है कि मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।ड्ढr ड्ढr पिछले दो महीनों में उत्तर भारतीयों पर यह आठवां बड़ा हमला है। हमले का यह सिलसिला यूं तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के भड़काऊ बयानों के बाद से ही शुरू हो गया था मगर इसने तेजी पकड़ी 3 फरवरी को जब दादर इलाके में उत्तर भारतीय टैक्सी चालकों, सब्जीवालों, रेहड़ी वालों के साथ मारपीट व तोड़फोड़ के बाद मनसे समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताआें के बीच भिड़ंत हुई। इसके बाद तो यह सिलसिला बढ़ता चला गया। हालांकि वीडियो फुटेज और दवाब के बाद पुलिस ने 25 सर्मथकों को गिरफ्तार तो कर लिया मगर मामले ने गंभीर रूप ले लिया। इसके बाद 4 फरवरी को ही मनसे समर्थकों ने ठाणे में एक सिनेमा हाल को अपना निशाना बनाया जिसमें भोजपुरी फिल्म चल रही थी। ठाणे प्रताप टॉकीज में चल रही भोजपुरी फिल्म ‘सैंया से सोलह श्रृंगार’ की प्रिंट उतारकर फेंक दी गई और वहां जमकर तोड़फोड़ की गई। इसी तरह की एक घटना नासिक में भी हुई। इसके तुरंत बाद बॉलीवुड के प्रख्यात कलाकार अमिताभ बच्चन के घर पर कुछ उपद्रवियों ने पत्थर और बोतलें फेंकी।ड्ढr ड्ढr यह सिलसिला यहीं थमा नहीं और पांच फरवरी को भोजपुरी फिल्मों के मशहूर कलाकार मनोज तिवारी और उत्तर भारतीय कांग्रेस नेता संजय निरूपम के कार्यालय पर हमला किया गया। 7 फरवरी को फिर 20 से 25 मनसे कार्यकर्ताआें ने सेंट्रल मुंबई में बॉम्बे टैक्सी यूनियन के दफ्तर पर हमला कर दिया और ऑफिस स्टाफ के साथ मारपीट की व संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके विरोध में यूनियन ने हड़ताल कर दिया था। इसके बाद 10 फरवरी को एक बार फिर मनसे कार्यकर्ताआें ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उत्तर भारतीय वेंडरों और दुकानदारों पर हमला किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। नासिक में पुलिस ने 26 कार्यकर्ताआें को गिरफ्तार भी किया। इसके बाद 13 फरवरी को मनसे नेता राज ठाकरे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। राज की गिरफ्तारी की खबर सुनकर मुंबई, पूणे, जालना, बीड, औरंगाबाद और लातूर समेत राज्य के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। नासिक में हिंसा के दौरान एक व्यक्ित की जान भी गई। इसके बाद राज्य से बड़े पैमाने पर उत्तर भारतीयों का पलायन शुरू हो गया। इस पलायन के दौरान उत्तर भारतीयों के साथ ट्रेनों में भी र्दुव्‍यवहार की बात सामने आई। होली के बाद भी संताक्रुज इलाके में उत्तरभारतीयों के साथ मारपीट की गयी। इस घटना में मुंबई पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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