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ब्रेन स्ट्रोक में बैलूनिंग से लाभ मिलता: डा. यादव

बत्रा हॉस्पीटल,नई दिल्ली के डा. आर.डी .यादव ने बताया है कि पक्षाघात (ब्रेन स्ट्रोक) में बैलूनिंग से लाभ मिलता है। अभी तक इस विधि का प्रयोग हृदय रोग में किया जाता था। हर्ट हॉस्पीटल द्वारा शनिवार को आयोजित सीएमई की जानकारी देते हुए हॉस्पीटल के निदेशक डा.ए.के.ठाकुर ने बताया कि वैज्ञानिक सत्र में कई विशेषज्ञों के शोध-पत्र प्रस्तुत किये गए। उन्होंने कहा कि डा.यादव ने स्ट्रोक मैंनेजमेंट पर प्रकाश डाला। लकवा होने पर ब्रेन की नलियों का बैलूनिंग होने लगा है। बार-बार ब्रेन स्ट्रोक होने पर ‘सी.ए.एस.’ तकनीक लाभदायक है।ड्ढr ड्ढr सीएमई में जसलोक हॉस्पीटल, मुम्बई के निदेशक डा.ए.बी.मेहता ने बताया है कि एक्यूट हर्ट अटैक में एंजियोप्लास्टी से अधिक लाभ होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों के इलाज पर जितना पैसा खर्च होता है उससे कम पैसे में एंजियोप्लास्टी से इलाज किया जा सकता है। मरीज के इलाज में कम जटिलता होती है और कम समय में काम पर लौट आता है। पुष्पगिरि हर्ट सेंटर, केरल के मेडिकल डायरेक्टर डा.आर.जे.मंजूरन ने बताया कि उच्च रक्तचाप न सिर्फ हृदय को नुकसान पहुंचाता है बल्कि उसकी धमनी में रक्तस्रव का जिम्मेवार भी हो सकता है। जिन लोगों में 50 वर्ष में रक्तचाप सामान्य है उनमें 70-80 वर्ष आते ही 30 फीसदी लोगों में उच्च रक्तचाप की शिकायत पायी जाती है।ड्ढr ड्ढr एस्कर्ट के हृदय रोग (शिशु) विशेषज्ञ डा.आशुतोष मारवाह ने बताया कि नवजातों के हृदय रोग में इन्टरवेंशन या डिवाइस द्वारा समय पर इलाज होने से उनकी जान बचायी जा सकती है। पेडियाट्रिक कार्डियक सेंटर पर इस प्रकार का इलाज संभव है। सीएमई के वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता डा.एस.एन.आर्या, डा.विष्णु जैन, डा.बसंत सिंह, डा.रमेश चन्द्रा, डा.एस.एस.चटर्जी, डा.अचल सिन्हा और डा.बी.पी.सिंह ने किया। सम्मेलन में राजधानी सहित अन्य भाग के दर्जनों हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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