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विकलांगता पर भारी पड़ा परीक्षा का जोश

मन में दृढ इच्छा शक्ित हो तो हर कार्य सरल हो जाता है। उक्त पंक्ित को आजकल विभिन्न परीक्षा केन्द्रो पर दूर-दूर से आए विकलांग परीक्षार्थी चरितार्थ कर रहे हैं। डाक्टर इंजिनियर, शिक्षक बनने का सपना संजोय ये सभी अपनी जिदंगी को दोनों पैर से घसीटते हुए आते हैं। सैकड़ों की भीड़ में ये कोहिनूर की तरह चमकते हैं। पोलियो रोग से ग्रसित छात्र आज लोगों के श्रा के पात्र बने हुए हैं। परीक्षा केन्द्र के समीप आते जाते लोग उनकी दृढ इच्छा शक्ित की दाद देने से नहीं चूकते हैं। बी.एस. कॉलेज में पटना हाईस्कूल के छात्र सौरभ कुमार सिंह, पवन कुमार, रंजन कुमार सिंह और बलदेव इंटर कॉलेज में आदित्य नारायण दोनों पैर से विकलांग है। बचपन में पोलियो रोग से पैर खराब हो गया।ड्ढr ड्ढr मगर पारिवारीक महौल में मिली शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए बिकलांगता को दर किनार करते हुए पढ़ाई जारी रखी। रंजन गरीबी की मार झेलते पढ़ाई जारी किये हुए है। आदित्य के पिता सेना में सुबेदार हैं। देश सेवा की भावना के लिए आदित्य पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी करना चाहता है। इसी तरह सभी की कुछ न कुछ बनने की इच्छा है। कोई इंजिनियर बनना चाहता है तो कोई शिक्षक।ड्ढr ड्ढr खगौल में शिक्षा के लिए प्रेरणा देती संगमड्ढr खगौल (सं.सू.)। केन्द्रीय विद्यालय में दोनों पैरों से विकलांग संगम जब स्कूल के छत की सीढ़ियां रेंगते हुए एक-एक कर चढ़ती है तो शिक्षा के लिए ऐसी ललक देख सभी लोगों को प्रेरणा देती है। वह कहती है विकलांगता अभिशाप नहीं चुनौती है। पश्चिमी लोहानीपुर, पटना निवासी मध्यम वर्ग शिक्षक राजीव कुमार शर्मा की विकलांग लेकिन होनहार पुत्री संगम को विकलांग कहलाना हरगित पसंद नहीं है। कहती है मैं अपनी कड़ी मेहनत लगन एवं आत्म विश्वास के सहारे हमेशा दो पैर वालों से भी आगे रहना चाहती है। मेरी इच्छा है कि मैं पढ़ लिखकर डाक्टर बनूं और विकलांग लोगों की सेवा में जीवन न्योछावर कर दूं। इसी लक्ष्य को पाने के लिए व्रिा निकेतन गर्ल्स स्कूल कदमकुआं से दशम की परीक्षा 84 प्रतिशत अंक पाकर, अच्छी शिक्षा पाने के लिए केन्द्रीय विद्यालय खगौल में नामांकन करायी हूं। जहां के प्राचार्य डा. ए.के. झा क्लास शिक्षक एस.के. सिंह, सहपाठी के अलावा माता-पिता भाई-बहन सब हमें हमेशा प्रोत्साहित करते रहते हैं। प्राचार्य डा. ए.के. झा का कहना है कि संगम पढ़ाई- लिखाई में अच्छी है। खुशमिजाज, मेहनती एवं अनुशासनप्रिय है। इसमें जीवन जीने की कला है।संगम की मां अन्नु शर्मा,पिता राजीव कुमार शर्मा का कहना है कि अपनी बेटी की इच्छा शक्ित के अनुरूप लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अभावों में भी रहकर सबकुछ करना चाहते हैं।ड्ढr ड्ढr परीक्षा के दौरान 4 छात्राएं बेहोशड्ढr पालीगंज (सं.सू.)। शनिवार को सामाजिक विज्ञान की मैट्रिक परीक्षा के दौरान पालीगंज हाईस्कूल केन्द्र पर गर्मी से चार छात्राएं बेहोश हो गईं। इस वजह से केन्द्र के अंदर कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। फिर केन्द्राधीक्षक कृष्णनंदन सिंह, थानेदार अजय कुमार ने छात्राआें को ग्लूकोज व पानी पिलवाया तब वे होश में आयीं। इधर और दिनों की तरह शनिवार को भी संगीनों के साए में परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान एसडीआे राजकिशोर प्रसाद और उड़नदस्ता मजिस्ट्रेट जयप्रकाश सिंह ने कई केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया।ड्ढr ड्ढr पढ़ने की कोई उम्र नहीं होतीड्ढr दानापुर (हि.प्र.)। ज्ञान प्राप्त करने की कोई उम्र और सीमा नहीं होती है। जिदंगी कम पड़ जाती है मगर ज्ञान पूर्ण प्राप्त नहीं हो पाता है। इस बात को अग्निदेव सिंह ने सच साबित कर दिये हैं। मैट्रिक की परीक्षा बी.एस. कॉलेज में दे रहे अग्निदेव सिंह की उम्र 46 वर्ष से अधिक है। लेकिन पढ़ने और कुछ करने की तमन्ना संजोय हुए हैं।

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