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रविवार को कोषागार से जारी हुए डेढ़ सौ करोड़

वित्तीय वर्ष खत्म होने के एक दिन पहले 30 मार्च को रविवार था। बावजूद इसके मुख्य कोषागार कार्यालय खुला हुआ था। जल निगम, जल संस्थान, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, पावर कारपोरेशन, समाज कल्याण, आवास विकास परिषद के अधिकारी वित्तीय स्वीकृतियों की पत्रावलियों को पास कराने के लिए कोषागार के बाहर जमा रहे। इन महकमों के लिपिकों अधिकारियों के हाथों में वित्तीय पत्रावलियाँ के ढेर था लेकिन कोषागार अधिकारियों ने रविवार को सिर्फ अति महत्वपूर्ण पत्रावलियाँ ही स्वीकारीं, बाकी को सोमवार को आने के लिए कहा गया। अलबत्ता कई दिनों से लंबित पत्रावलियों पर कार्य होता रहा। मुख्य कोषाधिकारी अजय कुमार मौर्या पावर कारपोरेशन, गंगा एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट और जनल निगम की वित्तीय पत्रावलियों के अध्ययन में जुटे रहे। देर शाम पावर कारपोरेशन के लिए सौ करोड़ रुपये जारी कर दिये गए। कई महकमों के 10 से 25 लाख रुपए तक के चेक जारी हुए। अभी अरबों रुपए जारी होने के लिए पत्रावलियाँ रखी हुई हैं। मुख्य कोषाधिकारी का कहना है कि सभी लंबित पत्रावलियों की छानबीन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। कुछ पर आपत्तियाँ भी लगाई गई हैं। सोमवार की शाम तक प्रकरण निस्तारित कर दिए जाएँगे।

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