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किसानों के जीवन में फूलों ने बिखेरे रंग

नाजुक टहनियों के सहारे हवा में झूलते ग्लैडिआेलस के दहकते फूल अब बारुण के किसानों के जीवन में भी नए रंग भर रहे हैं। बारुण में प्रति एकड़ 10-15 हजार रुपए कमाने वाले किसान अब उतनी ही जमीन में कम परिश्रम से चार लाख रुपए तक की कमाई फूलों की खेती के माध्यम से कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr इस परिवर्तन के अगुआ तथा किसान श्री से सम्मानित किसान मनीष कुमार ने जब बारुण आए तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ग्लैडिआेलस के फूलों का गुलदस्ता भेंट की तो कामयाबी की चमक उनके चेहरे पर देखी जा सकती थी। उच्च शिक्षा प्राप्त मनीष कुमार ने परंपरागत खेती की जगह कुछ साल पहले सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती शुरू की जिसमें बाद में ग्लैडिआेलस जैसे सजावटी पौधे भी शामिल हो गए। उनका अनुशरण करते हुए बारुण के किसान अब तेजी से खेती के इस नए तौर-तरीके को अपना रहे हैं।ड्ढr ड्ढr बारुण में फिलहाल ग्लैडिआेलस के अतिरिक्त स्टीनिया, लेमन ग्रास, मेंथा, सफेद मूसली सिन्दूरी की भी खेती परवान पर है। राजमार्ग-2 के करीब होने तथा ग्रैंड कार्ड रेल लाइन के करीब होने का बारुण के नई पीढ़ी के किसान जमकर लाभ उठा रहे हैं और बारुण में उपजे फूलों को बनारस, पटना, रांची तथा कोलकाता तक की फूल मंडियों तक पहुंचा देते हैं जहां इन फूलों की अच्छी कीमत मिलती है। किसान मनीष कुमार बताते हैं कि उत्तर प्रदेश की मंडियों में औषधीय पौधों की अच्छी खासी मांग है तो वहीं कोलकाता-रांची में फूलों की अच्छी मांग है। इस प्रकार परंपरागत खेती की बजाय इस नई खेती में किसानों की किस्मत बदलनी शुरू कर दी है।

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