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केंद्रीय सेवाआें में पिछड़ों की स्थिति अजा से भी बदतर

जदयू ने कहा है कि केन्द्रीय सेवाओं में पिछड़ी जातियों की स्थिति अनुसूचित जाति-जनजाति से भी बदतर है। इन सेवाओं में उनकी भागीदारी महज पांच फीसदी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता डॉ. शंभूशरण श्रीवास्तव ने रविवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केन्द्र सरकार के कैबिनेट विभाग की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसके बाद अब क्रीमीलेयर का सवाल ही पैदा नहीं होता। पिछड़ी जाति के लोग केन्द्रीय सेवाओं में महज ‘छांछ’ के रूप में हैं।ड्ढr ड्ढr हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य की सेवाओं में भी उनकी स्थिति बेहतर नहीं है। उन्होंने बिहार सरकार से भी इसी आधार पर सर्वे कराने की मांग की। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि केन्द्रीय सेवाओं में जहां पिछड़ी जातियों की भागीदारी 5.21 प्रतिशत है वहीं अनुसूचित जाति (अजा) की हिस्सेदारी 17.74 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (अजजा) की 6.3ीसदी है। ग्रुप ए की सेवा में पिछड़ी जाति 4.7 प्रतिशत हैं वहीं अजा 11.प्रतिशत और अजजा 4.3 प्रतिशत हैं। ए,बी,सी और डी सेवाओं में पिछड़ी जाति के महज 4.3 प्रतिशत हैं जबकि अजा 18.3 और अजजा 6.प्रतिशत हैं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की कि वह अभियान चलाकर पिछड़ी जाति के लोगों को केन्द्रीय सेवाओं में बहाल करे। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण सुनिश्चित करने, केन्द्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक अधिकार प्रदान करने, राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना कराने और संसद की नचिअप्पन कमेटी की अनुशंसा के आधार पर न्यायपालिका में पिछड़ी जाति के साथ-साथ अजा व अजजा के लिए आरक्षण की भी मांग की।

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  • Web Title: केंद्रीय सेवाआें में पिछड़ों की स्थिति अजा से भी बदतर