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नीलाम नहीं हुईं परिवहन निगम की1300 बसें

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दस साल बाद भी नीलाम नहीं हो सकीं राज्य पथ परिवहन निगम की 1300 खटारा बसें। बिहार और झारखंड के बीच निगम की परिसंपत्ति और देनदारी का बंटवारा नहीं होने से यह मामला अबतक अटका हुआ है। नतीजतन ऑफ रोड बसों की कीमत अब कौड़ियों की हो गयी है जबकि इनकी नीलामी से निगम को 12.5 करोड़ रुपये मिलने थे। अगर काम समय पर पूरा हो जाता तो उक्त राशि से निगम में कम से कम 156 नयी बसों की खरीद हो जाती।ड्ढr ड्ढr सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 1ो ऑफ रोड बसों की नीलामी का आदेश दिया था। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद वर्ष 2003 तक महज 70-80 बसों की ही नीलामी हो पायी। तभी बिहार और झारखंड के बीच निगम के बंटवारे का मामला उलझने से बसों की नीलामी लगातार टलती गयी। अधिसंख्य ऑफ रोड बसें 20 वर्ष से भी अधिक पुरानी हैं। खुले में रखी इन बसों की हालत लगातार वर्षा और मौसम की मार झेलते-झेलते कबाड़ जैसी हो गयी है। राज्य परिवहन कर्मचारी संघ के महासचिव विजयधारी कुमार ने बसों की शीघ्र नीलामी की मांग की है। निगम को सालाना 40 करोड़ का घाटाड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बसों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाने से राज्य पथ परिवहन निगम को सालाना 40 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। निगम में चलने लायक बसों की संख्या 620 है, जबकि वहां औसतन 310-315 बसें ही हरेक माह चलती हैं। बाकी बसें दुर्घटना, टायर-टय़ूब की कमी या दूसरी छोटी-मोटी खराबी की वजह से गैराजों में बेकार खड़ी रहती हैं। इसका सीधे निगम की आय पर असर पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो अगर 80-0 प्रतिशत बसें ठीक-ठाक चलने लगें तो निगम की प्रति माह आय बढ़कर आठ-नौ करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। गत वर्ष अगस्त में 303, सितम्बर में 284, अक्तूबर में 304, नवम्बर में 310, दिसम्बर में 315 और इस वर्ष जनवरी में केवल 303 बसों का परिचालन हुआ। नतीजतन हरेक माह औसतन तीन-चार करोड़ रुपये की ही आमदनी हुई। मतलब क्षमता का पर्याप्त उपयोग नहीं होने से निगम को हरेक माह तीन-चार करोड़ रुपये से हाथ धोना पड़ रहा है। इस राशि के मिल जाने पर निगम अपने तमाम कर्मचारियों को पूरे माह का वेतन देने की स्थिति में आ सकता है।ड्ढr ड्ढr विभाजन के प्रस्ताव पर अंतिम सुनवाई 10 कोड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ 10 अप्रैल को बिहार और झारखंड के बीच राज्य पथ परिवहन निगम विभाजन के प्रस्ताव पर अंतिम सुनवाई करेगी। उस दिन निगमकर्मियों को पूरे माह का वेतन देने के मामले पर भी विचार होने का अनुमान है। कोर्ट ने गत 11 मार्च को दोनों राज्यों को जस्टिस (सेवानिवृत्त) सगीर अहमद की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी थी। समय सीमा अब समाप्त होने को है। ऐसे में कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सीधा आदेश देगा। निगम में निगम की 1147 करोड़ रुपये की संपत्ति, देनदारी और कर्मचारियों का बंटवारा 65:35 के अनुपात में होना है।

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  • Web Title: नीलाम नहीं हुईं परिवहन निगम की1300 बसें