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1 रुपए में चार घंटे काम !

ाम 24 घंटे और मजदूरी छह रुपये से भी कम। महीने का वेतन 175 रुपये। ये राज्य के दलपति हैं जो अपने वेतन से अपना पेट भी नहीं भर पा रहे हैं। जब वे दलपति बने थे तो घर में खुशी की लहर दौड़ी थी और अब उन्हें लग रहा है कि किसी ने उनकी उम्र कौड़ियों के मोल खरीद ली।ड्ढr ड्ढr आजिज दलपति एक सप्ताह से आर. ब्लाक चौराहे पर पड़े हैं। फिर भी आशान्वित हैं कि इस बार या तो सरकार उनके लिए आदमी की तरह जीने की व्यवस्था करेगी नहीं तो वे यहीं जान दे देंगे। अदालतों ने लगभग चार हजार दलपतियों की बात को सही ठहरा दिया है लेकिन बिहार सरकार उनकी बात नहीं सुनती है। दलपति पंचायतों के सहायक पुलिस होते हैं। प्राथमिकी दर्ज कराने से लेकर, छापेमारी और गांव में पहरेदारी तक इनके जिम्मे है।ड्ढr ड्ढr उनकी हालत को देखते हुए 1में राज्य सरकार ने तय किया था कि ग्राम सेवक के पद पर दलपतियों की बहाली होगी। ग्राम सेवक का पद जब पंचायत सेवक का बना तो भी इस पद पर उनकी बहाली होती रही। 1में पंचायत सेवक का नाम पंचायत सचिव हो गया और सरकार ने इस पद पर उनकी नियुक्ित बंद कर दी। इसके खिलाफ दलपति हाईकोर्ट गए। हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। वहां भी दलपति जीते लेकिन सरकार नहीं मानी। दलपतियों ने हाईकोर्ट में अवमानना वाद दायर किया। अब सरकार अदालत से बार-बार समय ले रही है। सरकार का एक और कहर उनपर टूटा है। उसने 1से लेकर 1े बीच नियुक्त 16 सौ दलपतियों की छंटनी कर दी। दलपति मांग कर रहे हैं कि उन्हें चतुर्थवर्गीय कर्मचारी का दर्जा मिले, छंटनीग्रस्त दलपतियों को सेवा में लिया जाए और उनके रिटायर होने की उम्र साठ वर्ष की जाए।

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